पीलीभीत। पीटीआर के इको सेंसिटिव जोन में नियमों की अनदेखी कर कराए गए निर्माणों की जांच करने पहुंची नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की संयुक्त टीम ने दो दिन तक स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर कागजी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर मिला। टीम ने रिजॉर्ट, होटल और अन्य निर्माणों समेत 35 ढांचों का भौतिक सत्यापन कर अपनी जांच पूरी कर ली है। अब विस्तृत रिपोर्ट 27 जुलाई को एनजीटी के समक्ष पेश की जाएगी।
पीटीआर के इको सेंसिटिव जोन में बिना अनुमति रिजॉर्ट, होटल और अन्य पक्के निर्माण कराए जाने की शिकायत एनजीटी तक पहुंची थी। इस पर ट्रिब्यूनल की डिवीजन बेंच ने संयुक्त जांच समिति गठित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। समिति में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), उत्तर प्रदेश वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को शामिल किया गया। वन विभाग की ओर से कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित, एनटीसीए की ओर से सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) पवन जेफ और जिला प्रशासन की ओर से एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रसून द्विवेदी को नामित किया गया। संयुक्त टीम बुधवार को पीलीभीत पहुंची।
टीम ने कलीनगर और पूरनपुर तहसील क्षेत्र में जंगल से सटे इलाकों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान कई निर्माण ऐसे मिले, जिनकी स्थिति और स्वरूप अभिलेखों से मेल नहीं खाते थे। टीम ने मौके पर आवश्यक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किया। शुरुआती शिकायत में 21 निर्माणों का उल्लेख किया गया था। बाद की जांच में 27 और निर्माण सामने आए। कुल 35 निर्माणों की विस्तृत जांच की गई।
जांच पूरी होने के बाद टीम पीटीआर मुख्यालय पहुंची, जहां डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने सदस्यों को पीटीआर की कॉफी टेबल बुक भेंट की। इसके बाद अधिकारियों ने वन एवं वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ भरत कुमार डीके के साथ पौधरोपण भी किया। बृहस्पतिवार को टीम वापस रवाना हो गई। एसडीएम कलीनगर प्रमेश कुमार ने बताया कि संयुक्त टीम ने सभी चिन्हित निर्माणों का गहन निरीक्षण किया। राजस्व और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में भौतिक सत्यापन व पैमाइश कराई गई है।