गजराज का भारत-नेपाल सीमा पर आतंक
- फोटो : अमर उजाला
भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाके में जमीन का विवाद बढ़ता जा रहा है। इस क्षेत्र में नेपाल का दखल बढ़ गया। दो दिन पूर्व नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी और अन्य टीमें छह हाथियों पर सवार होकर पहुंचीं और पिलर खड़ा करने लगीं। सूचना पर पहुंची भारतीय क्षेत्र की वन और राजस्व विभाग की टीमों ने बातचीत की। बाद में नेपाल की टीम इसे अपना क्षेत्र बताकर लौट गई।
कलीनगर तहसील क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा से सटा इलाका लंबे समय से विवादित बना है। यह रमनगरा और गुन्हान गांव की सीमा में आता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर-27 और 28 की बीच की दूरी काफी अधिक होने के कारण पहले से ही विवाद की स्थिति रही है। पूर्व वर्षों में आई बाढ़ के बाद से जमीन का सीमा का विवाद उत्पन्न हो गया था। टाइगर रिजर्व और राजस्व विभाग भी संयुक्त सीमांकन न होने से सीमा विवाद में उलझ गया। इधर, चार साल पूर्व नेपाल की ओर से सर्वे के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 27 और 28 के बीच दो सब पिलर स्थापित कर दिए थे। शेष लगाना बाकी थे।
जमीन अपनी बताकर भारतीय क्षेत्र के लोगों ने रोक लगा दी थी। जमीन पर पट्टा होने की बात कही गई। भारतीय लोगों खेती भी जारी रखी। करीब एक माह पूर्व नेपाल की सेना और शुक्ला फांटा सेंचुरी ने हस्तक्षेप बढ़ाया और टीम ने दो भारतीय लोगों पकड़ लिया था। सेना ने नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का हवाला दिया था।
राजस्व और वन विभाग ने की बात, लौट गई नेपाल टीम
बृहस्पतिवार को छह से अधिक हाथियों से पहुंची नेपाल की सरकारी मशीनरी, शुक्ला फांटा सेंचुरी की टीम पिलर लगाने की बात कहने लगी। राजस्व व टाइगर रिजर्व के वनकर्मी और सर्वेयर से बातचीत हुई। नेपाल की टीम की ओर से जमीन को अपना बताकर अतिक्रमण और खेती करने से कड़ा एतराज जताया गया। भारतीय क्षेत्र के लोगों ने अपना पक्ष रखते हुए दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। क्षेत्रीय लेखपाल गजेंद्र सिंह ने बताया कि नेपाल की ओर से आई टीम से संयुक्त रूप से बातचीत की गई। इसके बाद टीम लौट गई थी। मामले की अफसर को रिपोर्ट दी गई है।