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मुफलिसी का दर्द भुला खुशी से झूमे खरूआवासी

Tue, 08 Dec 2015 11:22 PM IST
plibhit
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एसएसबी मुख्यालय बनाने को अधिगृहीत की गई जमीन के मामले में हाईकोर्ट का निर्णय किसानों के पक्ष में आने के बाद गांव खरूआ में उत्सव का माहौल है। आठ साल में भुखमरी के कगार पर पहुंचे चुके लोगों ने निर्णय की जानकारी मिलने के बाद आतिशबाजी की और मिठाई बांटकर खुशी मनाई।
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26वीं वाहिनी एसएसबी का मुख्यालय बनाने को प्रशासन ने वर्ष 2005 में ललौरीखेड़ा के निकट खरुआ गांव की 72 एकड़ जमीन अधिगृहीत कर ली थी। इसके बाद किसान नेता वीएम सिंह ने जमीन का वाजिब मूल्य दिलाने की मांग कर वर्ष 2007 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आठ साल तक चले मुकदमे में सोमवार को किसानों के पक्ष में फैसला आया, जिसमें किसानों को वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना दाम देने के आदेश दिए गए हैं। कुछ किसानों को कोर्ट के आदेश की जानकारी देर रात ही हो गई थी लेकिन मंगलवार सुबह समाचार पत्रों से इसकी पुष्टि होने से गांव में उत्सव का माहौल है। हर किसी के चेहरे खिले हुए हैं। खुशी से झूम रहे लोगों ने आतिशबाजी की और मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी। खुशी के इस मौके पर बीत आठ साल मुफलिसी का जीवन याद कर लोगों के आंसू भी छलक उठे। ग्रामीणों ने इस जीत के लिए किसान नेता वीएम सिंह एवं उनके सहयोगी गयासद्दीन एवं मीडिया का आभार जताया।

मठ्ठा बेचकर गुजारा वक्त
खरुआ में ढाई बीघा जमीन से अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था, लेकिन जमीन का अधिग्रहण हो जाने से रोटी रोजी का संकट आ गया। घर पर बची भैंस का मठ्ठा शहर में बेचकर किसी तरह जिंदगी गुजारी है। कोर्ट के निर्णय से राहत मिली।
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राधेश्याम।

मजदूरी की लेकिन हिम्मत नहीं हारी
साढ़े तीन एकड़ जमीन से तीन बच्चों के साथ मजे से जिदंगी कट रही थी। लेकिन प्रशासन ने हमें कंगाल कर दिया। बच्चों की पढ़ाई छूट गई। मजबूरी में रूद्रपुर की मजदूरी करनी पड़ी। अब बच्चों की पढ़ाई पूरी कराने के साथ नए सिरे से जिदंगी शुरू करूंगा।
प्यारेलाल।

जिंदा लाश बनकर गुजारा वक्त
परिवार की शामिल खाते में जमीन थी। जमीन जाने के कुछ दिनों बाद पति नन्हेंलाल भी दुनिया से विदा हो गए। किसी तरह हिम्मत जुटा खुद को संभाला और मजदूरी कर बच्चों को पाला।
सुशीला देवी।

पैसा तो ठीक, बीती खुशियां कहां मिलेगी
आठ साल की लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट से केस तो जीत गए। इससे अब काफी पैसा मिलेगा लेकिन इस बीच हमारे पति हमें छोड़ गए। खेलने कूदने की उम्र में बच्चों को मेहनत मजदूरी करनी पड़ी। तिल तिल बीता खुशियों का समय वापस नहीं मिलेगा।
नन्हीं देवी।

किसानों को बर्बाद होने से बचाया
गांव की जमीन अधिग्रहण होने के बाद प्रशासन ने उस समय के हिसाब से दाम लेने का काफी दबाव बनाया। लेकिन किसान नेता वीएम सिंह ने किसानों का मामला कोर्ट पहुंचकर बर्बाद होने से बचाया है। गांववासी उनका यह एहसान कभी नहीं भुलेंगे।
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गयासदुद्दीन, पूर्व जिला पंचायत सदस्य
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