राजनीतिक श्रेय लेने को लगातार हो रही बयानबाजी
मझोला की बंद पड़ी चीनी को चलाने की कवायद पिछले एक साल से हो रही है, लेकिन इस सीजन में इसके चलने के आसार नजर नहीं आ रहे। किसी ग्रुप या कंपनी को लीज पर देेने के बाद इसकी मरम्मत कर चालू कराने को कम से कम एक से डेढ़ साल का समय लगेगा। वहीं जनप्रतिनिधि इसका श्रेय लेने को बार-बार कोरी बयानबाजी से जनता को दिलासा दिला रहे हैं।
मझोला स्थित सहकारी चीनी मिल को बसपा के शासन काल में करीब नौ वर्ष पूर्व बंद दिया गया था। कुछ दिन बंद रहने के बाद सपा सरकार ने इसे चलाने की कवायद शुरू की। पांच साल के शासन काल के अंतिम वर्ष यानि लगभग एक वर्ष पहले सपा सरकार की कैबिनेट बैठक में इसे लीज पर देने का प्रस्ताव पास किया गया था। इसके बाद सरकार बदल गई। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर भाजपा से जुड़े प्रतिनिधि इसे चलवाने को सक्रिय हुए। परिणाम स्वरूप योगी मंत्रीमंडल की दूसरी बैठक में बंद मिलों को चलवाने के लिए करीब 350 करोड़ रुपये जारी करने का एलान किया गया था। योगी सरकार की घोषणा के बाद से क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी थी इस सीजन में मिल का सत्र शुरू हो जाएगा, लेकिन सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। परिणाम स्वरूप गन्ना पेराई का यह सीजन भी बिना मझोला मिल चले ही शुरू हो गया। वहीं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान इस पर चर्चा से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ी है, लेकिन क्षेत्रीय किसान इसे हकीकत से ज्यादा श्रेय लेने को छोड़ा गया शिगूफा मान रहे हैं।
विभाग ने शुरू की तैयारियां
मझोला मिल चलना भले ही अभी दूर की कौड़ी हो लेकिन गन्ना विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। मिल चलने से पहले ही क्षेत्र में गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाने को नर्सरी तैयार कराई जा रही है। इसके लिए पहले चरण में एक हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल लिया गया है, जबकि फरवरी में बसंतकालीन बुवाई के समय में भी लगभग इतने ही क्षेत्रफल में बुवाई का लक्ष्य है।
मिल स्थानीय निकाय का चुनाव भी शुरू
गन्ना विभाग के विकास कार्यक्रम के साथ ही प्रशासन ने भी मिल के स्थानीय निकाय के चुनाव शुरू कर दिए गए हैं। सदस्यों के निर्वाचन के बाद डेलीगेट्स चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद उपाध्यक्ष का चुनाव होगा।