पीलीभीत। जिला अस्पताल की रसोई से मरीजों को दिए जाने वाले भोजन व पौष्टिक आहार में सिर्फ औपचारिकता बरती जा रही है। अस्पताल में मरीजों को भोजन तो समय से मिल जाता है, लेकिन फल व दूध कभी-कभार ही मिलता है। मरीजों का कहना है अस्पताल की रसोई से फल की जगह उनके कुछ टुकड़े सिर्फ चखने भर के लिए दिए जाते हैं। वहीं दूध ज्यादातर दिया ही नहीं जाता है।
भले ही शासन की ओर से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन, नाश्ते व पौष्टिक आहार पर हर माह लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हो, बावजूद इसके मरीजों को मानकों के मुताबिक आहार नहीं मिल पा रहा। अस्पताल की रसोई से नाश्ते में दूध की जगह दूध की दलिया, पोहा, चने आदि दिए जाते हैं।
वहीं दोपहर व रात्रि भोजन में रोटी, चावल, एक सब्जी व दाल दी जा रही है, जबकि दूध व फल मरीजों तक नहीं पहुंचते। मरीजों ने बताया कि खाना तो ठीक मिल जाता है। मगर, फल को काटकर दो-तीन टुकड़े दिए जाते हैं। फल मांगो तो और भी मरीज हैं कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
मरीज बोले-ज्यादातर खाने को मिलता है पपीता
फलो को लेकर मरीजों ने बताया कि जिला अस्पताल में वैसे तो फल दो-दो दिन तक नहीं मिलते हैं। अधिकांशत: पपीता ही दिया जाता है। क्योंकि पपीता सस्ता होता है। बड़ा होने के कारण उसके कई टुकड़े हो जाते हैं। वही टुकड़े मरीजों को बांट दिए जाते हैं।
खाद्य विभाग ने भी कभी नहीं परखी गुणवत्ता
वैसे तो खाद्य सुरक्षा विभाग आमतौर पर शहर के रेस्टोरेंट, होटल आदि से आए दिन खाद्य पदार्थों का नमूना लेकर लखनऊ भेजता है। मगर, जिला अस्पताल की रसोई से मरीजों को दिए जा रहे खाने की गुणवत्ता परखने से खाद्य विभाग ने दूरी बना रखी है। बताया तो यह भी जा रहा है कि खाद्य विभाग की टीम ने अब तक मरीजों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता तक नहीं परखी है।
मरीजों ने बताई अपनी-अपनी परेशानी-
आर्थो वार्ड में बेड नंबर 13 पर भर्ती हैं। फल तो कभी-कभी मिलते हैं, लेकिन टुकड़ों में। खुद ही घर से मंगवा लिए जाते है।- चेतराम
एक सप्ताह से वह जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। इलाज चल रहा है। भोजन मिला है, लेकिन फलों का वितरण नहीं हुआ।- सलीम
सर्जिकल वार्ड के बेड संख्या आठ पर भर्ती हैं। इलाज तो हो रहा है। खाना भी मिल रहा, लेकिन दूध नहीं मिलता। - ओमप्रकाश
जिला अस्पताल की रसोई से मरीजों को पौष्टिक भोजन व आहार का वितरण किया जाता है। खाना व नाश्ता मानकों पर सौ फीसदी खरा है। फलों के वितरण की जानकारी की जाएगी। - डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक, जिला अस्पताल