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आतंकियों ने नेपाल  तक की थीं वारदातें

Thu, 14 Apr 2016 11:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
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 आतंकवाद के दौर में आतंकियों ने तराई की तलहटी में अपनी दहशत फैलाने के उद्देश्य से नेपाल तक वारदातें की थीं। मकसद था कि बीएसएफ या पुलिस से मुठभेड़ के बाद वह आसानी से नेपाल की ओर निकल जाए।
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आतंकवाद का वह दौर जिसको लेकर पूरी तराई का मात्र सिख वर्ग ही नहीं, हर वर्ग ही परेशान हो उठा था। वजह यह थी कि यह इलाका नेपाल सीमा से सटा होने के चलते आतंकवाद की शरणस्थली बन गया था। क्षेत्र में सिख किसानों की बस्तियां और उससे सटे इलाके में दोनों ओर बीहड़ जंगल होने का लाभ आतंकवादी उठा रहे थे। इसी के चलते इस क्षेत्र में आतंकवादी भिंडरवाला टाइगर फोर्स, खालिस्तान कमांडो फोर्स व कई अन्य संगठन गुट बनाकर लोगों का अपहरण कर फिरौतियां वसूल रहे थे। आतंकियों द्वारा पुलिस की मुखबिरी के शक में खुलेआम हत्याएं की जा रही थीं। जिसके चलते पुलिस का दबाव भी इसी क्षेत्र में अधिक होने लगा था। उस दौरान माधोटांडा व हजारा थाने पर बीएसएफ तैनात की गई थी। रमनगरा चौकी को उस समय कोतवाली बनाने की भी घोषणा की गई थी। वहीं दूसरी ओर आतंकवादी भी घटनाओं को अंजाम देकर अपनी शरणस्थली बनाने में जुटे थे। उन्होंने कभी बीएसएफ व पुलिस से मुठभेड़ के समय अपनी जान बचाकर नेपाल भागना पड़े, इस उद्देश्य से नेपाल के बाबाथान में ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर अपनी दहशत फैलाई थी। यह फायरिंग भिंडरवाला टाइगर फोर्स के सतनाम सिंह के गुट ने की थी। इन वारदातों का उद्देश्य मात्र जनपद में सक्रिय पुलिस व बीएसएफ से बचकर आसानी से उत्तराखंड में पहुंचना माना गया था। सतनाम सिंह गुट ने खूंखार आतंकी यादवेंद्र सिंह यादूू की हत्या के बाद उत्तराखंड जाकर उसकी हत्या का बदला लिया था। इस आतंक की काली छाया छंटने के बाद तराई के सभी वर्गों ने राहत की सांस ली थी। यही नहीं आतंकवादियों का यह हाल था कि वह मीडिया पर अपना कब्जा करने लगे और अपने गुरुमुखी में लिखे लेटर अखबारों में छपवाने का प्रयास करते थे। 
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