उप संभागीय कृषि प्रसार कार्यालय परिसर में हुई गोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने किसानों को चैनी धान न लगाकर बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग की खेती की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चैनी धान को प्रतिबंधित करने पर विचार हो रहा है। डॉ. रीना सी सेठी ने न्यूट्री फार्म योजना में समूहों के माध्यम से उगाई जाने वाली गेहूं की एचडी 2,967 प्रजाति मेें पाए जाने वाले तत्वों की उपयोगिता की जानकारी दी। पोषण और सुरक्षा तथा कुपोषण के बारे में बिस्तार से बताया। डॉ. फैज मोहसिन ने पापुलर की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी। डॉ. एसएस ढाका ने गेहूं, दलहनी और तिलहनी फसलोें में लगने वाले रोगों की पहचान, उनसे निदान के बारे में बताया।
उप परियोजना निदेशक आत्मा राजकुमार ने कृषि विभाग की चलाई जा रही योजनाओं के बारे में, प्रभारी एडीओ (कृषि) राजकुमार चौहान ने बीज भंडार, कृषि रक्षा इकाई में उपलब्ध बीजों आदि की जानकारी दी। खंड तकनीक प्रबंधक राजीव कुमार वाजपेई ने छोटी, छोटी बचत के लाभ बताए। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के इंद्रपाल, सीताराम आदि मौजूद रहे। संचालन अनिल कुमार गौतम ने किया।