पीलीभीत। जिले में ब्लॉक स्पॉट चिह्नित करने पर तो जोर है मगर यहां सुधारात्मक कार्य नहीं कराए जा रहे। इस वजह से हादसों पर लगाम नहीं लग रही। विभाग की ओर से आठ नए ब्लैक स्पॉट चिह्नित होने के बाद कुल संख्या 26 हो गई है। इसके बाद भी नए तो छोड़िए पुरानों पर भी संकेतक लगाने सहित हादसे रोकने के इंतजाम नजर नहीं आते। कोहरा बढ़ने के साथ हादसों की संभावना और बढ़ गई है।
तेज रफ्तार, क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने और अन्य कारणों से हर साल कई लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। हादसों में कमी लाने के लिए विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम और वाहनों की जांच अभियान चलाए जाते हैं। अधिक दुर्घटना वाले स्थानों को चिह्नित कर उन्हें ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता है।
इन स्थानों पर लोक निर्माण विभाग की ओर से सुरक्षात्मक कार्य कराए जाते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक कुल 19 ब्लैक स्पाॅट थे। बीते कुछ माह में हुए हादसों के बाद शहर के असम चौराहे से बीसलपुर जाने वाले मार्ग पर आठ नए ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदारों ने इन स्थानों पर किसी तरह का सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराया है।
ये बने ब्लैक स्पॉट
परिवहन विभाग ने बीसलपुर मार्ग पर असम चौराहा, जंगरौली पुल, बजाज चीनी मिल, जिरौनिया, जसोली, पतरासा, परसिया, भड़रिया मोड़ को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। पतरासा के पास हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है। शुक्रवार को पतरासा में कोई भी संकेतक या सुधारात्मक कार्य नजर नहीं आया। शहर के असम चौराहे पर भी किसी तरह के सुरक्षात्मक कार्य नजर नहीं आए। यहां पूरे दिन भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ओवरब्रिज निर्माण भी चल रहा है।
पुराने ब्लैक स्पॉट पर भी अधूरी व्यवस्थाएं
पूरे जिले में करीब 19 ब्लैक स्पॉट पूर्व से ही है। इन ब्लैक स्पॉट पर लगे संकेतक उखड़ गए हैं। लगातार हादसों के बाद भी विभाग कागजी कार्रवाई में जुटा है। यहां हादसे कम करने की कवायद पर किसी का जोर नहीं है।
विभाग का दावा, हादसों में आई कमी
जिले में वर्ष 2023 में 321 हादसे हुए। इनमें 165 लोगों की मौत और 247 लोग घायल हुए है। वर्ष 2024 में अब तक 311 हादसे हुए। इनमें 152 लोगों की मौत हुई और 254 लोग घायल हुए हैं। विभाग के अनुसार हादसों में कमी आने के साथ ही इस वर्ष मौतों का आंकड़ा भी घटा है।
पीलीभीत के असम चौराहे से बीसलपुर जाने वाला मार्ग।संवाद