गोमती के उद्गम स्थल पर लोकगायिका मालिनी अवस्थी। संवाद
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पीलीभीत। पर्यटन के लिए चूका बीच में परिवार के साथ आईं लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व की कायल हो गईं। बातचीत में उन्होंने कहा कि तमाम टाइगर रिजर्व देखे पर यहां जैसी वनसंपदा कहीं और देखने को नहीं मिली। खूबसूरत और शांत वातावरण के साथ वन्यजीव विचरण का यहां अद्भुत नजारा है। वह बोलीं- बाघ देखने को नहीं मिल सका तो क्या हुआ, लेकिन मन भरा नहीं है पीलीभीत टाइगर रिजर्व फिर आएंगे।
उन्होंने बताया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व और चूका बीच की खूबसूरती के बारे में सुना था लेकिन डीएम पुलकित खरे के आमंत्रण पर अपने भाई, पुत्र, पुत्री और दामाद के साथ आकर अब देखा है। उन्होंने चूका बीच की सुंदर हट और शारदा सागर डैम का नजारा देखा। जंगल की सैर कर वन संपदा और वन्यजीवों के दीदार भी किए। पीलीभीत टाइगर रिजर्व का ग्रांस लैंड देखकर अच्छा लगा। जंगल घूमने के दौरान बाघ तो नहीं दिख सका लेकिन अन्य वन्यजीव बारह सिंघा, हिरन, सांभर, चीतल देखने को मिले। दो दिवसीय दौरे के दौरान रविवार शाम लखनऊ चली गईं।
गंगा की तरह है गोमती नदी का सम्मान : मालिनी
लोकगायिका और अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी की पत्नी मालिनी अवस्थी रविवार को गोमती उद्गम स्थल पर नमन करने पहुंची। प्रसिद्ध दुर्गानाथ मंदिर और गोमती मैया के मंदिर पर पूजन किया। इसके बाद मुख्य झील में दीया प्रवाहित किया। उन्होंने कहां कि गंगा की तरह गोमती नदी का सम्मान है। उद्गम स्थल पर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
उद्गम स्थल पर लोकगायिका मालिनी अवस्थी का योगेश्वर सिंह ने स्वागत किया। गोमती के पौराणिक इतिहास को पढ़ने के बाद परिसर में घूमी। वातावरण को निहारा। बाबा दुर्गानाथ मंदिर और गोमती मैया के मंदिर पर पूजा की। दीप प्रवाहित किए। अशोक वाटिका क्षेत्र में पहुंचकर रुद्राक्ष वृक्ष की भी पूजा की। सफाई व्यवस्था, सौंदर्य की खूबसूरती को सराहा।