पीलीभीत। आधी आबादी किसी मायने में पुरुषों से कमतर नहीं है भले ही वह खेती जैसा मेहनत वाला ही काम क्यों न हो। लालपुर गांव की मधु गंगवार उन्हीं महिलाओं में से एक हैं जो दो साल पहले तक चूल्हा चौका करने तक सीमित थीं। कोरोना काल में हुई छोटी सी शुरूआत से उनमें उद्यमशीलता पैदा हो गई। अब आमदनी के साथ उम्मीद के कई अवसर महिला समूह के सामने हैं।
ओमवती और मधु गंगवार समेत समूह की प्रत्येक महिला सदस्य ने ग्रीष्मकाल और शीतकाल के दो-दो महीने में चालीस-चालीस हजार रुपये तक कमाए। इससे मधु और ओमवती के साथ लालपुर स्वयं सहायता समूह की उन सभी महिलाओं के चेहरों पर खुशी है जो आर्थिक रूप से सबल होने का सपना वर्षों से देख रहीं थीं। सपना हकीकत में तब बदला जब गन्ना विभाग ने उन्हें पौध तैयार करने की विधि सिखाई। अब महिलाओं का स्वयं सहायता समूह सफलतापूर्वक पौध तैयार कर रहा है। इन्हें देखने के बाद जिले में कई और समूह भी बने हैं। लालपुर गांव की दूसरी महिलाओं ने भी पैरों पर खड़े होने की ठानी है। मधु के समूह में ही छह महिलाएं और जुड़ गईं हैं।
देश के अन्य राज्यों तक हुई समूह की गूंज
जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र ने बताया कि गन्ने की प्रजातियों से घर बैठे चिप तैयार करने की शुरूआत पीलीभीत जिले से हुई लेकिन इसकी गूंज दूसरे राज्यों तक हुई। गन्ना आयुक्त ने पीलीभीत की नजीर देख दूसरे जिलों में महिलाओं के समूह गठित कराए। भारत सरकार के संयुक्त सचिव सुबोध कुमार सिंह फरवरी 2022 में खुद गांव आए। समूह की कार्यविधि को समझकर गन्ना आयुक्त से बातचीत की। उन्होंने कहा था कि देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह से समूह बनाने को प्रेरित करेंगे।
कैसे होती है आमदनी
जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र बताते हैं कि सरकार प्रति पौधा 1.30 रुपये और 1.50 रुपये अनुदान देती है जबकि डेढ़ रुपये प्रति पौधा बिक्री से मिलता है। लालपुर के स्वयं सहायता समूह ने 2021-22 के सीजन में 1.5 लाख पौधे बेचकर 4.5 लाख रुपये कमाए हैं। सरकार से 3.91 लाख रुपये अनुदान मिला। समूह की महिलाओं ने बताया कि वे वर्ष में चार महीने काम करती हैं और बीते वर्ष 40 हजार रुपये एक महिला की आमदनी रही। औसतन दस हजार रुपये महीने की आमदनी हुई। अहम बात यह है कि अपने घर से कहीं बाहर जाना नहीं पड़ा। पहले खाली समय में जो महिलाएं आपसी चर्चा में वक्त बिताती थीं अब वह गन्ने की छोटी-छोटी चिप काटकर उसे उपचारित करती ट्रे में रोपाई करती हैं। इसके 20-25 दिन बाद पौध तैयार हो जाती है और पौध के बदले अधिकतम तीन रुपये प्रति पौध के हिसाब से आमदनी होती है।
ऐसे तैयार होती है पौध
उन्नतशील प्रजाति का गन्ना महिलाओं को गन्ना विभाग उपलब्ध कराता है। जिस ट्रे में पौध तैयार की जाती है वह ट्रे और गन्ने की चिप काटने की मशीन गन्ना विभाग ने उपलब्ध कराई है। अपने पशुओं के गोबर से महिलाएं खाद तैयार करती हैं। गोबर की खाद, नारियल के बुरादा और मिट्टी को बराबर मात्रा में मिश्रित करके ट्रे के खानों में भरा जाता है। प्रत्येक खाने में एक सिंगल बड या फिर बड चिप लगाई जाती है। इससे पौध तैयार होती है।
गन्ने की चिप से पौध तैयार करने का काम सितंबर, अक्टूबर और फरवरी-मार्च में होता है। इस तरह से एक वर्ष में कुल चार महीने काम होता है। घर से कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि बिक्री की जिम्मेदारी विभाग उठाता है।
समूह में शामिल हैं यह महिलाएं
लालपुर महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष मधु गंगवार और सचिव ओमवती हैं। सदस्यों में शकुंतला देवी, त्रिवेणी देवी, उषा देवी, उर्मिला देवी, प्रेमा देवी, राकेश कुमारी, सरोज कुमारी, पारुल भारती, शांति देवी हैं। इनकी सफलता के बाद लालपुर से माधुरी देवी, पायल देवी, शकुंतला, गीता, गायत्री, पुष्पा समेत पांच और महिलाएं जुड़ गईं हैं।
आर्थिक तौर पर अपने पैर पर खड़े होने के लिए हमें घर बैठे ही रास्ता मिल गया। हम चाहते हैं कि प्रत्येक महिला एक लाख रुपये वार्षिक कमाए। - मधु गंगवार
मैंने कभी सोचा नहीं था कि घर बैठे मेहनत करके कमाने का ऐसा कोई रास्ता मिलेगा। गन्ना की पौध तैयार करके हम अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं। - ओमवती