बरूआ कुठारा की 110 हेक्टेअर जमीन पर 51 साल से झोपड़पट्टी डाल खेती कर रहे 73 परिवारों से शनिवार को वन विभाग ने राजस्व कर्मियों और पुलिस की मदद से अतिक्रमणयुक्त भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई के क्रम में चिन्हित कर तूदाबंदी कर दी है। वन विभाग का दावा है कि अभियान के चलते उन्होंने संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटा उसे कब्जे में ले लिया है। भारी तामझाम और पुलिस फोर्स के चलते ग्रामीण इसका विरोध तो नहीं कर सके लेेकिन आंसुओं के रूप में बाहर आ रहा दर्द उनके चेहरों पर साफ झलक रहा था। वन विभाग ने कब्जे में ली गई जमीन पर पिलर भी लगवा दिए हैं।
माधोटांडा थाना क्षेत्र में टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में बरूआ कुठारा गांव में करीब 110 हेक्टेअर जमीन पर 1966 से ग्रामीण काबिज थे। वर्ष 1976 में इसे धारा 20 के तहत वनभूमि दर्ज कर दिया गया। इसके बाद से ही जमीन पर विवाद चल रहा है। काबिज लोगों ने कोर्ट में वाद दायर किया लेकिन वनविभाग के मजबूत पक्ष के आगे ग्रामीण हार गए। इसके बाद वनविभाग ने कब्जा लेने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते वनविभाग नाकाम रहा। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जमीन से अवैध कब्जे हटाने को चलाई गई मुहिम के तहत जमीन से कब्जा हटाने की रणनीति तैयार की गई। शनिवार को सुबह पांच थानों की फोर्स माधोटांडा थाने पर एकत्र हुई जबकि पांचों रेंजों के वनकर्मी एसडीओ केपी सिंह के नेतृत्व में बराही गेस्ट हाउस में एकत्र हुए। करीब 11 बजे कलीनगर एसडीएम सूरज यादव के नेतृत्व में टीम फायर ब्रिगेड और जेसीबी मशीनों के साथ बरूआ कुठारा पहुंची। भारी फोर्स एवं व्यवस्थाएं देख ग्रामीणों को कार्रवाई का अंदाजा हो गया और विरोध करने को एकत्र होने लगे। मौके की नजाकत को देखते हुए एसडीएम ने कार्रवाई से पहले ग्रामीणों से बातचीत करने का निर्णय लिया। एकत्र ग्रामीणों ने एसडीएम एवं सीओ पूरनपुर अनुराग दर्शन ने बातचीत की। जिसमें ग्रामीणों ने अपना पक्ष रखते हुए पैमाइश की मांग की। इस पर एसडीएम ने पैमाइश के निर्देश दिए। एसडीएम के निर्देश पर बरुआ कुठारा, भरारी और लेहारी गांव की सीमाओं से नाप शुरू हुई। शाम पांच बजे तक नापजोख में जमीन वनविभाग की निकली। इस पर एसडीएम ने पुन: ग्रामीणों से बात की और जमीन खाली करने को कहा। इसके बाद वनविभाग की टीम ने राजस्व टीम की मदद से चिन्हित जमीन पर पिलर लगाकर सीमांकन किया। एसडीओ केपी सिंह ने बताया कि जमीन पर कब्जा लेकर पिलर लगा दिए गए हैं। जेसीबी की मदद से चारों ओर खाई खोदी जाएगी। इस मौके पर रेंजर अनिल शाह, डीके श्रीवास्तव, गिरराज सिंह, इंस्पेक्टर मनोज त्यागी, तहसीलदार शेरबहादुर सिंह भी मौजूद रहे।
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छलछला उठीं ग्रामीणों की आंखें
जमीन की पैमाइश के बाद वनविभाग ने जेसीबी की मदद से पिलर लगाना शुरू कर दिया। इसे देख जमीन पर वर्षों से काबिज ग्रामीण एवं महिलाओं के आंसू छलक उठे। ग्रामीणों को अब रोजी रोटी के लिए दूसरा जरिया तलाशना होगा।
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मिलेंगे पटटे और आवास
जमीन खाली कराने से पूर्व ग्रामीणों से हुई बातचीत के दौरान एसडीएम सूरज यादव ने उन्हें दूसरे स्थानों पर पट्टे दिलाने एवं आवास के लिए जमीन देकर सरकारी योजना से आवास दिलवाने का आश्वासन दिया।
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फोर्स के चलते नहीं कर सके विरोध
जमीन कब्जा मुक्त कराने को वनविभाग इस बार पूरी तैयारी के साथ गया था। वन, पुलिस और राजस्व के लगभग 350 अधिकारी कर्मचारियों के अलावा दो फायर ब्रिगेड और जेसीबी मशीनों को देख ग्रामीण विरोध की हिम्मत नहीं जुटा सके। पिलर लगने से पहले कुछ लोगों ने विरोध का प्रयास भी किया लेकिन सीओ पूरनपुर अनुराग दर्शन ने सूझबूझ से उन्हें शांत कर दिया। आशंका व्यक्त की जा रही है वनविभाग जब पुन: जमीन पर खांई खोदने अथवा अन्य कार्यों को जाएगा तो ग्रामीण विरोध कर सकते हैं। विभाग को कब्जा बरकरार रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।