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Pilibhit News: 'केसरी' को रास आता था जंगल, दहाड़ से थर्राता था इलाका, सीएम योगी ने बाघ को दिया था यह नाम

Tue, 01 Apr 2025 11:01 AM IST
मुकेश कुमार फखरूल इस्लाम, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत में केसरी बाघ ने माला रेंज से सटे आठ किलोमीटर के इलाके में कई लोगों पर हमला किए थे। इसके बाद सितंबर 2024 में उसे पकड़कर पीलीभीत से गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। दो दिन पहले वहां बाघ की मौत हो गई। 
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पिंजड़े में कैद बाघ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीलीभीत के जंगल से रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर भेजे गए बाघ केसरी की मौत से वन्यजीव प्रेमी दुखी हैं। उनका मानना है कि अगर वह जंगल में होता तो शायद अभी जिंदा होता। उसे माला रेंज की आबो-हवा खूब रास आती थी। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के विशालकाय बाघों में उसका नाम भी शामिल था। आठ किलोमीटर का इलाका उसकी दहाड़ से थर्राता था। वर्ष 2024 में माला रेंज से सटे इलाके में उसने कई लोगों पर हमले किए थे। 23 सितंबर 2024 को भैरों बीट से उसे रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। 

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पीटीआर में 70 से अधिक बाघ हैं। सितंबर 2024 में माला रेंज की भैरों बीट से बेहोश कर पकड़ा गया केसरी भी इन्हीं में से एक था। पीटीआर के अफसर भी उसकी भारी-भरकम कद-काठी के मुरीद थे। नौ सितंबर को जंगल सीमा से सटे बांसखेड़ा गांव निवासी मजदूर केदारी की बाघ के हमले में मौत होने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया। 

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मुख्यमंत्री ने दिया था केसरी नाम 
मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और लोगों के आक्रोश को देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने विभागीय अनुमति के बाद बाघ को पकड़ने के प्रयास शुरू किए। 23 सितंबर को तड़के भैरों बीट के जंगल में बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया था। बाघ को दो-तीन दिन पीटीआर मुख्यालय पर पिंजरे में रखा गया। विभाग की अनुमति के बाद बाघ को गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया। वहां भी बाघ आकर्षण का केंद्र था। पूर्व में चिड़ियाघर के निरीक्षण के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे केसरी नाम दिया था। 

चर्चाओं में रहा था चंदू का किस्सा 
पीटीआर का एक अन्य बाघ भी वर्ष 2018 में सुर्खियों में रहा था। पांच मार्च को माधोटांडा क्षेत्र के चांदपुर गांव में महिला को मारने के बाद घेराबंदी कर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया था। बाघ की कद-काठी देख रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसर और कर्मचारी दंग रह गए थे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बाघ को बेहोश करने में सफलता मिली थी। 

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दो दिन तक मुस्तफाबाद में रखकर बाघ को नौ मार्च 2018 को दुधवा भेजा गया था। वहां बाघ का नाम चंदू रखा गया। लोकेशन ट्रेस करने के उद्देश्य से उसके गले में रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ दिया गया था। करीब डेढ़ माह तक उसकी लोकेशन मिलती रही, लेकिन बाद में उसका कोई पता नहीं लगा। कुछ समय बाद बाघ के नेपाल की ओर निकल जाने की बात सामने आई, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
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विसरा समेत तीन सैंपलों की जांच से खुलेगा मौत का राज
पीलीभीत से रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर ले जाए गए बाघ केसरी की मौत के बाद विसरा सहित तीन सैंपल जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) लाए गए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक जांच में करीब सप्ताहभर लग सकते हैं। सोमवार को ईद के अवकाश की वजह से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। 

जानकारी के अनुसार,गोरखपुर में हुए पोस्टमार्टम में उसके दिमाग में पानी भरा मिला था। आईवीआरआई वैज्ञानिकों के मुताबिक जलीय पदार्थ, विसरा समेत तीन सैंपल सोमवार सुबह 11 बजे संस्थान पहुंच गए हैं। विस्तृत जांच के बाद रिपोर्ट गोरखपुर चिड़ियाघर के अफसरों को भेज देंगे। 
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