कवि सम्मलेन में कविता पाठ करते कवि।
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पीलीभीत। हिंदी साहित्य भारती एवं साहित्य सागर हौसलों की उड़ान के संयुक्त तत्वावधान में साइन इंग्लिश मीडियम स्कूल में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने काव्यपाठ कर श्रोताओं को विभिन्न मुद्दों पर झकझोरा। झारखंड से आईं कवयित्री अंकिता सिन्हा ने कहा- रुख पर तेरी वफा की निशानी नहीं प्यार कर तू मुझसे बेईमानी नहीं। जयपुर राजस्थान से आए गिरीश सोनवाल ने कहा- बड़े नसीबों से मिलती हैं, भाग्य वालों को मिलती हैं, किस्मत वाले होते हैं वह जिनको बेटियां मिलती हैं। आरा बिहार से पधारे कवि प्रेम सागर पांडे ने अपनी रचना में कहा-मुसीबतों का घर गिराने में सपनों का महल बनाने में बैठ चुका हूं थककर आग बुझाने। इसके पश्चात मुरादाबाद से आए अजय वंश सरल ने कहा-खुद को जो कभी उदास पाया करो मेरे गीत मेरी गजलें गुनगुनाया करो। नागपुर महाराष्ट्र से आए कवि साहिल कुमार ने कहा एक गंजे के सर पर केवल दो ही बाल थे एक बाल ने कहा क्यों ना हम विवाह कर ले बरेली से आए डॉ. राकेश यदुवंशी ने कहा हमारे दौर में भी इश्क वाले ऐसे आए हैं जिन्होंने पर्वतों को काटकर रस्ते बनाए हैं। पूरनपुर से आए विकास आर्य स्वप्न ने कहा- रूठ गयो भगवान भैया का होई, डूब गयो सब धान भैया का होई। उत्तराखंड रुद्रपुर से हास्य व्यंग सभी जयंत शाह ने कहा- तू सिर्फ चुनावी नारा है ज्यादा बोलेगा अखबार में छप जाएगा अबे सरकारी फाइल में पैदा हुआ सरकारी फाइल में ही दब जाएगा। कानपुर से आई शृंगार रस की कवयित्री डॉ. अंजना कुमार ने कहा कोशिश करो इतनी की हर ख्वाहिश पूरी हो जाए तुम्हें देखकर लोग नसीहत दे नसीहत के वक्त सिर्फ तुम्हारा जिक्र है। गजलकार अमित कुमार श्रीवास्तव ने कहा- पल-पल जलता रावण पल-पल मारे राम सब की जिजीविषा में मचा हुआ कोहराम। मुजीब साहिल ने कहा - आज भी खाली घर जाएं क्या, भूखे प्यासे मर जाएंगे क्या। संजय पांडे गौहर ने कहा- मन के बहुत मिले मगर धागा नहीं मिला, सोना तो मिला दोस्त सुहागा नहीं मिला। उमेश त्रिगुणायत में कहां- गांव के देवघर घाट पर अतिक्रमण दिन के अपने प्लाट पर अतिक्रमण। इसके पश्चात कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हैं अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा- जो समाज में जहर घोलते हैं, वो न हिंदू न मुसलमान होते हैं, वह आदम हव्वा की नहीं शैतान की औलाद होते हैं। जीतेश राज नक्श ने कहा- हर एक त्योहार पर इज्जत बचानी पड़ ही जाती है उधारी लेकर के गरीबी छुपानी पड़ ही जाती है। डॉ. अमित कुमार ने कहा- आंसुओं में नहाया ये अखबार है। कुलदीप कल्प ने कहा- प्यार से नफरत से हमदर्दी चालाकी हुशियारी से, कैसे बचा सकेगा कोई खुद को दुनियादारी से।
कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि हेमराज वर्मा कार्यक्रम अध्यक्ष अमिताभ अग्निहोत्री ने कवियों को सम्मानित किया। डॉ. दिवाकर सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा एवं गांव के ग्राम प्रधान परशुराम मौर्य एवं वेद प्रकाश के साथ-साथ पूर्व प्रधान प्रेमपाल प्रजापति मौजूद रहे। हिंदी साहित्य भारती के जिला अध्यक्ष रवि शर्मा ने कवियों का एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। संचालन कुलदीप कल्प ने किया।