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नहीं मिला न्याय तो सीएम के सामने आपबीती सुनाएगी छात्रा

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पीलीभीत। दुष्कर्म के आरोप में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कामरान आलम खान जेल में हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. संध्यारानी की ओर से निदेशक उच्च शिक्षा को जांच आख्या भेजी जा चुकी है। इसमें क्या कार्रवाई होती है? इस पर शासन को निर्णय लेना है। इसी बीच पीड़ित छात्रा का कहना है कि अभी तक पुलिस और विभागीय जांच में असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ आए साक्ष्य शामिल नहीं किए गए हैं। सरकारी सिस्टम के कुछ लोग उसे बचाने में लगे हुए हैं। इसी वजह से पीड़ित छात्रा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी पीड़ा बताना चाहती है।। ताकि किसी बेटी के साथ उसके जैसा बर्ताव न होने पाए।
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राजकीय महिला महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कामरान आलम खान के खिलाफ बीएससी की छात्रा ने 21 नवंबर को दुष्कर्म और सेक्स रैकेट संचालित करने का आरोप लगाया था। इसकी रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में अभी तक सेक्स रैकेट की पुष्टि नहीं हुई है। दुष्कर्म के आरोप में पुलिस चार्जशीट की ओर बढ़ रही है। छात्रा का कहना है कि अगर सही तरीके से विवेचना हुई होती तो साक्ष्य सामने आते। जिन छात्राओं ने असिस्टेंट प्रोफेसर की हरकतों की कलई विभागीय जांच के दौरान क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के सामने खोली थी। उनके बयान पुलिस ने दर्ज नहीं किए। ऐसे में सवाल यह है कि दोषी को सजा कैसे मिलेगी। एक और अहम बात यह है कि जब उसने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई तब उसे सात दिनों तक डॉक्टरी परीक्षण के लिए भटकना पड़ा। इस दौरान उसकी पहचान उजागर करने तक का प्रयास हुआ। इसी को लेकर वह मुख्यमंत्री से पूछना चाहती है कि जब मिशन शक्ति अब तीसरे फेज में है तो लड़कियों के प्रति अपराध के मामलों में सिस्टम के अधिकारियों और पुलिस कार्यप्रणाली क्यों नहीं बदल रही है? उसे उम्मीद है कि सीएम से मिलने के बाद इस मामले में शासन स्तर से कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जाएंगे।
प्रोफेसर जेल में, पुलिस की विवेचना जारी
21 नवंबर- बीएससी की छात्रा ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कामरान आलम खान के खिलाफ दुष्कर्म और सेक्स रैकेट के संचालन का आरोप लगाया। रिपोर्ट दर्ज कराई।
26 नवंबर- असिस्टेंट प्रोफेसर को पुलिस ने गिरफ्तार कर 27 नवंबर को अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को जेल भेजा। प्रोफेसर जेल में है।
04 दिसंबर- निदेशक उच्च शिक्षा के आदेश पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में जांच टीम आई। छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों और प्राचार्य क बयान लिए गए। जांच आख्या शासन को भेजी गई।
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05 दिसंबर- पुलिस की विवेचना जारी है। सेक्स रैकेट के संचालन का जो आरोप था उस पर पुलिस साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। पीड़िता ने जांच के तरीके पर पर सवाल उठाए हैं।
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