बाबा जयगुरुदेव के अनुयायियों ने मुक्ति दिवस मनाया। अनुयायियों ने उपवास रखा और घरों में ध्वज फहराया।
शहर
के सिरसा चौराहा के समीप एक मैदान में सोमवार को कार्यक्रम में बरेली से
वक्ता मिड़ईलाल गंगवार ने कहा कि महापुरुषों का जन्म दूसरों के हित के लिए
होता है। ज्ञानी पुरुषों की संगत में बैठने से ही मस्तिष्क का विकास होता
है और मनुष्य सदमार्ग की ओर अग्रसर होता है। ऐसे मनुष्यों पर अवगुणों का भी
असर नहीं होता है। रविंद्र सिंह ने अनुयायियों को मुक्ति दिवस के बारे में
विस्तार से बताया।
मुक्ति दिवस को लेकर अनुयायियों ने सुबह घरों में ध्वज
फहराया और उपवास रखा। शाम तीन बजे उपवास का परायण किया। इस दौरान भंडारा
हुआ। इस मौके पर नगराध्यक्ष वेदप्रकाश गुप्ता, गोपाल देवल, कामता प्रसाद
शर्मा, हरीश पांडेय, नन्हेंलाल, बालकराम, डॉ. गोविंदराम, प्यारेलाल,
अजयपाल, रामस्वरूप, गयादीन समेत तमाम बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल हुए।
बीसलपुर।
रामपुर से आए जयगुरूदेव संगत के प्रवक्ता बृह्मस्वरूप गंगवार ने सोमवार को
जयगुरूदेव आश्रम पर आयोजित मुक्ति दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि
संबोधित करते हुए कहा कि बाबा जयगुरूदेव 25 जून 1975 से 23 मार्च 1977 तक
आपातकाल के दौरान दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रहे थे।
उसके बाद 23 मार्च
1977 को रिहा हुए थे। उसी दिन से प्रत्येक वर्ष 23 मार्च से मुक्ति दिवस
कार्यक्रम मनाया जाता है। कार्यक्रम में फकीर चंद्र गंगवार, नरेंद्र सिंह,
हरीश चंद्र राठौर, महीपाल, राजेेंद्र सिंह, नरेश सिंह, नत्थू लाल, किशन
लाल, ओमप्रकाश, चंद्रपाल, ऊषा देवी, श्यामा देवी, सोनवती, भगवान देई, अनीता
देवी, उमाशंकर वर्मा, वीरेंद्र यादव, कांती देवी, कुसुम सिंह और मधु
गंगवार आदि वक्ताओं ने संबोधित किया। भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हो
गया।