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तीसरे दिन भी दिखा एक बाघ, दहशत के मारे जंगल मार्ग पर आवाजाही रही कम

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बीसलपुर ( पीलीभीत)। दियोरिया- घुंघचाई जंगल मार्ग पर घटनास्थल के पास बुधवार दोपहर फिर एक बाघ देखा गया। इससे जंगल से सटे इलाके के लोग सहमे हुए हैं। फिलहाल बुधवार को इस मार्ग पर वाहनों की नाममात्र को ही आवाजाही रही।
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दियोरिया- घुंघचाई वन मार्ग पर टूटा पुल के पास 11 जुलाई की रात दो बाघों ने एक बाइक से आ रहे दियोरिया निवासी सोनू और कंधई लाल को हमला कर मार डाला था। घटना के दूसरे यानी मंगलवार को घटनास्थल के आसपास दो बाघ मंडराते देखे गए। बुधवार को सुबह 11 बजे लखीमपुर के थाना गोला क्षेत्र के ग्राम ऊंचा गांव निवासी सोहन सिंह बीसलपुर से दियोरिया होते हुए कार द्वारा पूरनपुर जा रहे थे। उनके साथ उनके रिश्तेदार शाहजहांपुर के थाना खुटार क्षेत्र के गांव लौंगहा पुर निवासी वीर सिंह भी थे। कार सोहन सिंह चला रहे थे। दियोरिया- घुंघचाई जंगल मार्ग पर घटनास्थल से लगभग 50 मीटर दूर उत्तर की दिशा में इन लोगों ने एक बाघ को घूमते देखा। कार में पूरी तरह से सुरक्षित होने के बावजूद दोनों कार सवार बाघ देख घबरा गए। सोहन सिंह तेजी से कार चलाते हुए घुंघचाई की तरफ बढ़ गए। इस दौरान कार एक स्थान पर अनियंत्रित होकर पलटने से बच गई। सोहन सिंह ने दियोरिया जंगल के छोर पर स्थित वन विभाग के बैरियर पर मौजूद वनकर्मी श्रवण सिंह को घटनास्थल के पास एक बाघ होने की जानकारी दी। श्रवण सिंह ने इसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दी। बताते हैं कि वनकर्मी ने सोहन सिंह से इस मामले की विस्तृत जानकारी लेने का प्रयास किया, मगर भयभीत सोहन सिंह बाघ के डर से वहां ज्यादा देर तक नहीं ठहरे। उसके बाद सोहन सिंह कार लेकर घुंघचाई, पूरनपुर होते हुए लौंगापुर पहुंचे। उसने अपने रिश्तेदार वीर सिंह को उनके घर छोड़ा और उसके बाद वह अपने घर चले गए। बाघ के घटनास्थल के पास देखे जाने की जानकारी पर बुधवार को भी इस मार्ग पर लोगों की आवाजाही नाममात्र की ही देखी गई।
दियोरिया जंगल से सटे गांवों के किसानों में दहशत
दियोरिया के जंगल में दो बाघों की निरंतर मौजूदगी की जानकारी से जंगल से सटे गांवों के लोगों में दहशत बरकरार है। ग्रामीण बाघ के डर से खेतों पर जाने से बच रहे हैं।
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दियोरिया जंगल के आसपास दो दर्जन से अधिक गांव बसे हैं। इन गांवों के किसानों के खेत भी जंगल सीमा से सटे इलाकों में हैं। खेतों में आजकल धान की रोपाई और गन्ने के फसल की सिंचाई जोरों से चल रही है। दियोरिया जंगल में बाघों द्वारा दो युवकों की मारे जाने और जंगल में दोनों बाघों की निरंतर मौजूदगी होने से इन गांवों के ग्रामीण घबराए हुए हैं। हालत यह है कि किसान अब खेतों में जाने से भी बच रहे हैं। जिससे उनका कृषि कार्य प्रभावित होने लगा है। हालांकि कुछ किसान झुंड के रूप में खेतों पर जा रहे हैं। इनमें से एक व्यक्ति हर समय बाघों की निगरानी करता रहता है। मीरपुर रतनपुर, दियोरिया, रायपुर फाजिल, दियोहना, आमडंडा, बल्देवपुर, जयनगर, इलाबास देवल, रहमान गंज, बड़ेपुरा, कुसुमा, बसेंगा, खरदहाई, पसगवंा, किशनपुर, रामनगर, लोहन्ना, सोहन्ना, नवदिया बंकी, सिमराया, मटेना, ददौल कालोनी, डूडा कालोनी, काला बोझ आदि गांवों के लोग काफी दहशत में हैं।
कैमरों में कैद नहीं हो रहे बाघ
दियूरिया रेंज में दो बाइक सवारों को मार डालने वाले बाघ घटनास्थल के आसपास ही चहलकदमी कर रहे हैं, मगर पीटीआर प्रशासन द्वारा लगवाए गए कैमरों की पड़ताल में एक भी बाघ की फुटेज नहीं मिली। फिलहाल अभी कैमरे लगे रहेंगे।
पीटीआर की दियोरिया रेंज के जंगल में रविवार से बाघों ने चलती बाइक पर हमला कर दो बाइक सवार युवकों को मार डाला था, जबकि तीसरे बाइक सवार युवक ने रात भर पेड़ भर बैठकर जान बचाई थी। घटना के अगले दिन यानी सोमवार को पीटीआर प्रशासन द्वारा घटनास्थल और उसके आसपास क्षेत्र में 20 ट्रैपिंग कैमरे लगवाए थे, ताकि हमला करने वाले बाघों की पहचान हो सके। इधर, मंगलवार शाम घटनास्थल पर लगे सभी कैमरों की पड़ताल की गई तो कैमरों में एक भी बाघ की फुटेज नहीं पाई गई। फिलहाल कैमरों की जांच के बाद पुन: कैमरे लगा दिए गए। खास बात यह है कि मंगलवार और बुधवार को इसी मार्ग पर कुछ वाहन सवारों को दोनों दिन बाघ दिखाई दिया, जिसकी सूचना उन्होंने वनकर्मियों को भी दी। पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि कैमरों की जांच कराई गई थी, मगर कैमरों में बाघ की कोई फुटेज नहीं मिली है। फिलहाल अभी कैमरे लगे रहेंगे।
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