बीसलपुर। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग की विधि अधिकारी ने विवाहिता के इलाज में लापरवाही बरते जाने के मामले में जिलाधिकारी को छह दिसंबर को अपने कार्यालय में तलब किया है।
मोहल्ला ग्यासपुर निवासी सरताज अली ने पिछले माह उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को शिकायती पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया था कि उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी को डिलीवरी के लिए सीएचसी बीसलपुर में भर्ती कराया था। वहां उनकी ठीक तरह से देखरेख नहीं हुई।
इलाज में लापरवाही की गई। इस वजह से उन्हें अपनी पत्नी को पीलीभीत की एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाना पड़ा। बहुत मुश्किल से उसकी जान बच पाई। यह भी कहा गया कि उन्होंने जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आयोग के अध्यक्ष ने उसी समय जिलाधिकारी को इस मामले की जांच करवाने के निर्देश दिए थे। आयोग के निर्देश पर एसडीएम नागेंद्र पांडेय और सीओ डॉ. प्रतीक दहिया ने मामले की जांच कर रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष को भेजी थी।
आयोग ने जब जांच का अवलोकन किया तो पता चला कि उस जांच टीम में किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ को शामिल नहीं किया गया। नियमानुसार जांच दल में स्त्री रोग विशेषज्ञ को शामिल किया जाना चाहिए था। आयोग के अध्यक्ष ने जिलाधिकारी को दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिलाधिकारी छह दिसंबर को उनके कार्यालय में पेश होकर जांच रिपोर्ट दाखिल करें। इसके अलावा पहले वाली जांच टीम में स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल न किए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण भी दें।