मतभेद भुलाकर गले लगाने का त्योहार है होली
होली आते ही युवा चेहरों पर झलकती है खुशी
होली का पर्व बसंत ऋतु आते ही राग, संगीत और रंग के साथ ही खुशियां व भाईचारे का संदेश देता है और अपने साथ रंग बिरंगे आंचल को लेकर आता है और सब को ढक लेता है। हिंदुओं का यह प्रमुख त्योहार पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसका वर्णन हिंदू धर्म ग्रंथ विष्णु पुराण में किया गया है।
आपसी बुराई को भुलाने और एक दूसरे को गले लगाने का यह पर्व है। होली आते ही रंग गुलाल की तरह युवाओं के चेहरों पर एक अलग ही खुशी झलकने लगती है, जबकि कुछ विभागों में नौकरी पेशा लोगों को छुट्टी न मिलने का मलाल भी रहता है। महिलाएं भी होली की पूरी तैयारी करती हैं। कोई भौजी के साथ तो कोई ननद के साथ रंग गुलाल लगाने से नहीं चूकतीं। होली के रंगों में डूबे लोगों को असली प्यार का एहसास होता है। होली का पर्व मनाने के पीछे एक पुरानी कथा भी है, लेकिन आज सभी धर्मों के लोग इसे मिलजुल कर मनाते हैं। होली के दिन क्या शहर क्या गांव चारों ओर रंगों की बौछार ही दिखाई देती है, जबकि भक्त प्रहलाद की आस्था और विश्वास ने इस दिन अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त की थी।