Historical monuments include the centuries old Gauri Shankar Temple
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शहर का सदियों पुराना ऐतिहासिक गौरीशंकर मंदिर जनपद ही वरन आसपास जनपदों के श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। इस प्राचीन धरोहर का मुख्य आकर्षण प्राचीन शिवलिंग है। शिवलिंग में पार्वती का मुख भी है। सावन के अलावा यहां शिवरात्रि, नवरात्र और गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रहती है। सावन में दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त यहां कांवर लेकर आते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए अर्जी लगाते हैं।
शहर के पश्चिम दिशा में स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर में स्थित शिवलिंग में पार्वती का मुख भी है। बुजुर्गों के मुताबिक पूर्व में यहां जंगल था। यहां आकर बसे बंजारा समुदाय के लोगों को खेत की जुताई के दौरान शिवलिंग मिला था। उन्होंने कुछ समय तक सेवा करने के बाद इस शिवलिंग को वर्तमान में मंदिर की देखभाल करने वाले पंडित जयशंकर महंत के पूर्वजों को सौंप दिया था। उस दौरान छोटा सा मंदिर बनाया गया था। वर्ष 1997 में पुरातत्व विभाग ने मुख्य मंदिर में किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। बाद में पुरातत्व विभाग से अनुमति मिलने के बाद मंदिर को भव्य रूप दिया गया। इस मंदिर के पूर्व दिशा में रूहेला सरदार हाफिज रहमत खां द्वारा बनवाया गया भव्य प्रवेश द्वार जनपद की गंगा जमुनी तहजीब को विरासत के रूप में संजोए हुए है। वर्तमान में सुरक्षा की दृष्टि से यहां सीसी टीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। कांवड़ियों के ठहरने की भी व्यवस्था है।
बंजारा समुदाय के द्वारिका दास को मिला था शिवलिंग
शहर के जिस स्थान पर मंदिर स्थापित है यहां कभी बंजारा समुदाय के लोग खेतीबाड़ी करते थे। बुजुर्गों के मुताबिक कई सौ वर्ष पूर्व यहां द्वारिका दास बंजारे को खेती करने के दौरान जमीन में कुछ होने का अंदेशा हुआ। उसने जगह को खुदवाया तो उसे शिवलिंग के दर्शन हुए। द्वारिकादास कुछ सालों तक शिवलिंग की सेवा करते रहे, लेकिन संतान आदि न होने के कारण उन्होंने शिवलिंग की जिम्मेदारी पंडित जयशंकर महंत के पूर्वजों को सौंप दी थी। तबसे लेकर आज तक इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी मंदिर की सेवा करती आ रही है।
सावन में दिन में चार बार होता है अभिषेक कार्यक्रम
इस प्राचीन मंदिर में यूं तो साल भर श्रद्धालु पूजा अर्चना को आते हैं, लेकिन सावन में इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। मंदिर के पंडित जयशंकर महंत बताते हैं कि सावन में यहां रोजाना दिन में चार बार अभिषेक कार्यक्रम होता है जो लगातार 40 दिन तक जारी रहता है। इस मंदिर में रुद्राभिषेक का भी खासा महत्व है।