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कहीं गरीबों की जिंदगी पर न बरस जाए आग

Sun, 16 Jul 2017 10:37 PM IST
पीलीभीत।
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​पीलीभीत। - फोटो : ​पीलीभीत।
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हाल-ए-जिला अस्पताल
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जिला संयुक्त चिकित्सालय में उच्चीकरण के नाम पर अब करोड़ों फूंके जा चुके हैं, लेकिन इतने बड़े सरकारी भवन में आग से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। 210 बेड वाले इस चिकित्सालय के पुुरुष अस्पताल में तो नाममात्र के अग्निशमन यंत्र लगे हैं, लेकिन महिला अस्पताल में तो यह भी नहीं है। अस्पताल के बाहर स्टैंड पर झूलती खाली बाल्टियां अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता को बयां करती नजर आ रही है।
खाली बाल्टी और चंद अग्निशमन यंत्रों के सहारे पुरुष अस्पताल
जिला संयुक्त चिकित्सालय के 140 बेड वाले पुुरुष अस्पताल में अमूमन मरीजों की भरमार ही रहती है। वहीं, करीब एक हजार के आसपास ओपीडी होती है, लेकिन यदि इस अस्पताल में आग से बचाव के इंतजामों पर गौर करें तो यहां मात्र इमरजेंसी वार्ड, ओटी समेत अन्य स्थानों पर करीब दस अग्निशमन यंत्र लटकते नजर आते हैं। जनरल वार्ड भगवान भरोसे ही चल रहे हैं। इन अग्निशमन यंत्रों का प्रयोग कैसे किया जाएगा, इसकी शायद ही किसी को जानकारी हो। इमरजेंसी वार्ड के गेट पर चार लाल रंग की बाल्टियां स्टैंड पर लटकी नजर आई, लेकिन इसमें भी दो खाली दिखीं।
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महिला अस्पताल में आग के बचाव के इंतजाम सिफर
करीब 40 बेड वाले महिला अस्पताल में भी मरीजों की खासी भीड़ रहती है। यहां के वार्डों में तमाम मरीज भर्ती रहते हैं। रविवार को महिला अस्पताल में आग से बचाव के इंतजाम की तहकीकात की गई तो यहां एक भी अग्निशमन यंत्र और अन्य संसाधन नहीं मिले। बताते हैं कि कुछ दिन पूर्व यहां लगे अग्निशमन यंत्रों को हटा दिया गया। उन्हें रीफिलिंग के लिए भेजा गया है। 
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मानकों पर एक नजर 
- तीन फायर मशीनें जरूरी 
- आपरेशन थियेटर में कार्बन डाईऑक्साइड फायर मशीन
- बिजली बोर्ड के पास होनी चाहिए एबीसी पावडर मशीन
- जेनरेटर के पास होनी चाहिए फोम वाली फायर मशीन
आग से निपटने के लिये मानक
- सौ स्क्वायर मीटर पर पांच किलोग्राम का अग्निशमन यंत्र हो
- अंडरग्राउंड और छत पर दस हजार लीटर का टैंक हो।
पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरसी शर्मा ने बताया कि अस्पताल परिसर में जहां-जहां अग्निशमन यंत्रों की जरूरत हैं, वहां लगाए गए हैं। अभी हाल ही में इन्हें बदलवाकर लगवाया गया है। नए भवनों में अत्याधुनिक इंतजाम किए गए हैं। वहीं महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने बताया कि अग्निशमन यंत्रों को रीफिलिंग के लिए भेजा गया है। हाल ही में अग्निसुरक्षा को लेकर एक कंपनी से सर्वे कराने के बाद शासन को डिमांड भेजी गई है। अभी बजट नहीं मिला है।
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