पीलीभीत। सबसे समृद्ध भाषाओं में यदि कोई भाषा हिंदुस्तान में है तो वह है हिंदी। इसमें रोजगार भी है। लेकिन कुछ लोग इसका प्रयोग करने में हिचकते हैं, क्योंकि हिंदी में बात करना उन्हें अच्छा नहीं लगता। स्टेट्स सिंबल भाषा अंग्रेजी बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं तो क्यों न अपनी भाषा को भी आत्मनिर्भर बनाएं। हिंदी ताकतवर भाषा है। तेजी से यह आगे बढ़ रही है। रोजगार भी दे रही है। जरूरत इस बात की है कि इसका अधिकाधिक प्रयोग हो। सरकारी कार्यालय हो या शिक्षण संस्थान सभी जगह हिंदी में बातचीत करेंगे। तभी हिंदी का मान बढ़ेगा। इस विषय के साथ ही शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए काफी संख्या में लोग विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
संस्कृति को जिंदा रखना है तो हिंदी को साथ लेकर चलिए
हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक लोगों को करना चाहिए। केंद्र सरकार ने अब नई शिक्षा नीति में भी भाषा को आगे ले जाने की बात कही है। जब बच्चों को शुरू से ही हिंदी सिखाई जाएगी तो यह भाषा और समृद्ध होगी। शिक्षकों को भी हिंदी के लिए और प्रयास करना होंगे। संस्कृति को जिंदा रखना है, तो हिंदी को साथ लेकर चलाना होगा। हिंदी से ही हमारी पहचान है। हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसके हर शब्द में कई मायने हैं। - राजवीर सिंह, सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय बैकनिया दीक्षित
अभिभावक बच्चों को हिंदी में बात करना सिखाएं
अभिभावक बच्चों को सबसे पहले अंग्रेजी सिखाते हैं। हर चीज को वह अंग्रेजी में ही बताते हैं। यह अच्छी बात है, लेकिन अपनी मातृभाषा हिंदी को भी उन्हें बचपन से सीखाएं। ताकि वह संस्कृति को याद रख सके। हर भाषा का ज्ञान एक अच्छे व्यक्तित्व की पहचान है, लेकिन जिस देश में हम जन्में है, वहां की मातृभाषा को आगे बढ़ाना हमारा दायित्व बनाता है। हो सके तो हर अभिभावक को बच्चों से हिंदी में बात करनी होगी और उसके प्रति प्रेम जगाना होगा। तभी हिंदी का विकास संभव है। हिंदी वह भाषा है कि जिसमें हम अपने विचार उसी तरीके से दूसरे के सामने रख सकते हैं जिस तरीके से हम सोचते हैं। -चांदनी बग्गा, शिक्षिका, उच्च प्राथमिक विद्यालय कैच