नेपाल बॉर्डर से भारत में कुछ इस तरह आते जाते हैं नेपाली।
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पीलीभीत। पड़ोसी देश नेपाल में कोरोना संक्रमण के केस लगातार सामने आ रहे हैं। नेपाल की सीमा जिले से लगी है। लोग बिना किसी रोक-टोक के इधर से उधर आवाजाही कर रहे हैं। अगर वे वहां किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए तो कोरोना यहां तक आ सकता है।
पीलीभीत के तराई क्षेत्र में नेपाल की सीमा जुड़ी हुई है। यहां नेपाल और भारत में आने-जाने के लिए टाटरगंज, झनकिया, गभिया, गभिया सहराई, नगरिया और कुतिया कवर, नौजल्हा नकटा समेत विभिन्न मार्ग है। जहां से लोगों को आवागमन होता है। इस सीमा पर सशस्त्र सीमा बल को निगरानी के लिए लगाया गया है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया गया था लेकिन जून में हालात सामान्य होने के बाद रास्ते खुल गए थे। नौ जुलाई को जिला कोरोना से पूरी तरह मुक्त हो गया था। इसके बाद अब तक जिले में कोरोना का कोई भी केस नहीं निकला है। चूंकि नेपाल से लोग घरेलू सामान और सब्जियां खरीदने के लिए भारत में आते हैं। कुछ दिन से नेपाल में कोरोना संक्रमण के मामले में तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। गूगल पर अपलोड की गई नेपाल की रिपोर्ट में सात दिन के भीतर 1033 केस मिलने का उल्लेख किया गया है। इससे साफ है कि कोरोना के केस निकल रहे हैं। मगर इसके बाद भी नेपाल की सीमा पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सावधानी नहीं बरती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग कर रहा एंटीजन जांच और थर्मल स्क्रीनिंग के दावे
स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागजों में बॉर्डर पर अलर्ट करते हुए टाटरगंज और गभिया में सैंपलिंग का दावा कर रहा है। जबकि धरातल पर स्थिति अलग है। न तो बॉर्डर पर न एंटीजन किट से जांच की जा रही है और न ही थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही है। लोग बिना किसी रोक टोक के भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। अभी तक जिले में कोरोना को कोई भी केस नहीं है। मगर इसी तरह लापरवाही बरती गई तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से तीसरी लहर आने की जो आशंका व्यक्त की जा रही है, वह सच साबित हो सकती है।
कोरोना को लेकर अभी भी विभाग की ओर सतर्कता बरती जा रही है। लोगों की जांच कराई जा रही है। बॉर्डर पर टीमें लगी हुई है। सैंपलिंग कराई जा रही है। पूरनपुर एमओआईसी को वहां जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ