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लापरवाही : डेंगू वार्ड में नहीं है मच्छरदानी की व्यवस्था

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माधोटांडा सीएचसी में डेंगू का नहीं बनाया गया वार्ड - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। फिरोजाबाद और मथुरा समेत कई शहरों में डेंगू और मलेरिया से तमाम मौतों के बाद जिले में भी डेंगू के आठ केस मिल चुके हैं। इसके अलावा दो बच्चों की मौत हो गई है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग में अलर्ट तो जारी कर दिया गया है। लेकिन फिर भी हालत यह है कि अस्पतालों तक में मच्छरों से बचाव के साधन नहीं है। सरकारी अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के वार्ड तो बना दिए गए हैं। लेकिन मच्छरदानी तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अस्पतालों में भर्ती मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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पूरे जिले में बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। डेंगू के भी केस मिलने लगे है, लेकिन इसके बावजूद मच्छरजनित रोगों की रोकथाम की तैयारियां अब तक कागजों में दौड़ रही है। कहने को जिला मलेरिया विभाग डोमोस्टिक ब्रीडर चेकर्स अभियान के तहत ट्रैक एंड ट्रेस कर रहा है। मगर जिले के सरकारी अस्पतालों में बुखार के मरीजों को भर्ती करने के ही इंतजाम नाकाफी है। अस्पतालों में डेंगू के वार्ड तो बना दिए हैं, लेकिन वहां पर व्यवस्थाएं नहीं है। डेंगू और मलेरिया का प्रकोप बढ़ने के बाद जिले के आठ सीएचसी और 21 पीएचसी पर डेंगू वार्ड बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अधिकांश जगहों पर वार्ड हीं नहीं बनाए गए हैं। जहां वार्ड बना दिए गए हैं, वहां पर सुविधा देेने के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। कहीं मच्छरदानी नहीं है, तो कही वार्ड ही नहीं बना है। इसके अलावा साधारण वार्ड में भी मच्छरदानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मजबूरी में लोगों को शहर की तरफ ही अपना रुख करना पड़ रहा है। माधोटांडा सीएचसी पर सिफ कोविड के नाम पर एल-1 कोविड अस्पताल ही बनाकर छोड़ दिया गया है, जबकि इन दिनों डेंगू का प्रकोप चल रहा है, लेकिन इसको लेकर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसी तरह बीसलपुर में भी डेंगू वार्ड नहीं बनाया है। सीएचसी अधीक्षक का तर्क है कि अभी डेंगू का कोई मरीज नहीं आया है, अगर मरीज निकालता है। तो उसे बनवा लिया जाएगा। अमरिया सीएचसी में भी डेंगू वार्ड के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई है। सालों से गंदगी पड़ी मच्छरदानी को लगाकर वार्ड का नाम दे दिया गया है। हालात यह है कि अगर उस वार्ड में कोई मरीज बेड पर मच्छरदानी लगाकर लेट जाए। तो वह और बीमार हो जाएगा।
1600 की हुई ओपीडी
रविवार को ओपीडी सेवा बंद होने के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। इतना ही नहीं कई मरीज तो इमरजेंसी में भी पहुंचे। इसके बाद सोमवार को जब ओपीडी खुली। तो सुबह नौ बजे से ही पर्चा काउंटर पर लाइन लग गई। परिसर के अंदर भी डॉक्टरों के चैंबर फुल दिखाई दिए। दवा काउंटर पर बच्चों के सिरप और बुखार, खंासी के मरीज ही दवा लेते नजर आ रहे थे। सोमवार को जिला अस्पताल में 1598 की ओपीडी हुई। जिनमें कमर नंबर चार में फिजीशियन डॉ. रमाकांत सागर के पास करीब 150 से अधिक मरीज पहुंचे। जो वायरल फीवर से ग्रसित थे। इसके अलावा डॉ महावीर सिंह के चैंबर में भी मरीजों का तांता लगा रहा। यहां भी दोपहर एक बजे तक 120 से अधिक मरीज दिखाने के लिए पहुंचे। जिनमें अधिकांश बुखार, खांसी, जुकाम समेत बीमारियों से जूझ रहे थे।
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जिला अस्पताल में बने डेंगू वार्ड में मच्छरदानी का व्यवस्था कराई गई है। सीएचसी पीएचसी पर भी डेंगू वार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कहीं वार्ड नहीं बनाया गया तो उसे चेक कराकर व्यवस्था कराई जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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