पीलीभीत। जिले में संक्रामक बीमारियों का प्रसार तेज से बढ़ रहा है। बुखार से पीड़ित सात साल की बच्ची की मौत हो गई। पांच दिन पहले मासूम को पेट में दर्द होने के साथ बुखार आया था। इस पर परिवार वालों ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां हालत गंभीर होने पर उसे डॉक्टरों ने बरेली रेफर कर दिया। बरेली ले जाते वक्त रास्ते में उसकी की मौत हो गई। इधर, उसका बड़ा भाई भी बुखार से ग्रस्त है।
न्यूरिया थाना क्षेत्र के रमेश चंद्र ने बताया कि उनकी सात साल की बेटी आरोही को चार सितंबर को बुखार आ गया था। इस पर पहले तो परिवार वाले डॉक्टर से दवा लेकर उसे खिला दी थी, लेकिन आराम नहीं मिलने पर पांच सितंबर को उसे गांधी स्टेडियम रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने बच्ची को भर्ती करने के बाद उसकी जांचे कराई। हालांकि अभी तक किसी को यह नहीं पता है कि अस्पताल के द्वारा कौन सी जांचें कराई गई थी। छह सितंबर को हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे बरेली ले जाने की सलाह दी। इस पर परिवार वाले उसे दूसरे निजी अस्पताल में ले गए। वहां से भी उसे रेफर कर दिया। परिवार वाले शाम को बरेली लेकर जा रहे थे। तभी रास्ते में मासूम की मौत हो गई। परिवार वाले बच्ची को लेकर घर पहुंचे और उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इधर, उनका 11 वर्षीय बेटा अर्पित भी बुखार से ग्रस्त है। मामले की जानकारी मिलने पर मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके घर पहुंची। घर में पहले तो डेंगू लार्वा की तलाश की। लेकिन कुछ नहीं मिल सका। टीम ने परिवार वालों से बच्ची की रिपोर्ट मांगी, मगर रिपोर्ट को परिवार ने बच्ची के साथ ही दफन कर दिया। परिवार के सभी लोगों की डेंगू और मलेरिया की जांच की गई। जिसमें सभी निगेटिव मिले। उनके बेटे को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया गया। जहां उसकी मलेरिया, डेंगू और कोविड की जांच की गई। जोकि निगेटिव आई। डॉक्टरों के मुताबिक उसे वायरल फीवर बताया जा रहा है। फिर भी उसका सैंपल लेकर परीक्षण को लखनऊ भेजा गया है।
गांव में हुआ दवा का छिड़काव, 96 लोगों की हुई जांच
बच्ची की मौत के बाद प्रशासन ने भी स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। टीम ने सैदपुर गांव पहुंचकर बुधवार को पूरे गांव में दवा का छिड़काव करने के साथ ही 28 लोगों की डेंगू और 68 लोगों की मलेरिया की जांच की। लेकिन जांच में सभी निगेटिव मिले हैं। गांव में डेंगू का लार्वा भी नहीं मिल सका।
मासूम की मौत का रहस्य जाने के लिए अस्पताल से निकलवाई जाएगी रिपोर्ट
सैदपुर गांव में बच्ची की मौत के बाद परिवार वालों ने उसकी रिपोर्ट को भी उसके साथ दफन कर दिया। ऐसे में बच्ची की मौत कैसे हुई और उसकी कौन-कौन सी जांच हुई। इसके बारे में परिवार कुछ नहीं बता पा रहा है। इसलिए आईडीसीएसपी को अस्पताल से मृतका आरोही की बीएचटी के साथ जितनी भी जांचें हुई उन रिपोर्ट को निकलवाया जा रहा है। ताकि बच्ची की मौत की स्थिति स्पष्ट हो सके।
गांव में संक्रामक रोग की स्थिति जाने के लिए लखनऊ भेजे जाएंगे नौ सैंपल
जिले में बुखार से पहली मौत होने के बाद अफरा-तफरी मच गई है। हर कोई अब डरने लगा है। मौत की सूचना मिलने पर टीम ने गांव में जाकर पूरी पड़ताल की, लेकिन न तो गांव में कोई लार्वा मिला और न ही कोई अन्य कारण का पता चल सका। ऐसे में मलेरिया विभाग ने सैदपुर गांव से सात लोगों के सैंपल और दो प्राइवेट लैब में हुई जांच के सैंपल लेकर लखनऊ परीक्षण को भेज हैं। ताकि वहां डेंगू मलेरिया की क्या स्थिति है इसका आंकलन किया जाए सके। क्योंकि जिले में सिर्फ डेंगू कार्ड या पीवी और मलेरिया की पीएफ की ही सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुखार को अगर तीन चार दिन बीत गए है, तो वह कन्फर्म जानकारी किट नहीं दे पाती है। इसके लिए एलाइजा करना पड़ता है। अब रिपोर्ट आने के बाद सैदपुर गांव में क्या हालात यह इसका पता चल सकेगा।
बच्ची की मौत की सूचना मिलने पर टीम के साथ गांव में निरीक्षण किया था। परिवार बच्ची की कोई भी जांच रिपोर्ट नहीं दिखा सका। इसलिए मौत कैसे हुई। इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। अस्पताल से कागज निकलवाए जा रहे हैं। गांव में दवा का छिड़काव कराया गया है। उसके भाई को जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया है। जिसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। उसकी स्थिति ठीक है।- राजीव मौर्या, जिला मलेरिया सहायक अधिकारी