पीलीभीत। कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव भले कम हुआ हो, लेकिन लोगों को तीसरी लहर का डर सता रहा है। उन्हें अपने रोजगार की चिंता है। यहीं चिंताएं उन्हें मानसिक रूप से बीमार बना रहीं हैं। जिला अस्पताल के मन कक्ष में आने वाले ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है। आठ दिन के भीतर मन कक्ष में काउंसिलिंग के लिए 25 लोग पहुंच चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार तीन से चार महीनों में मनोरोगियों की संख्या में करीब 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुए 18 माह से अधिक समय बीत चुका है। कोरोना की वजह से इंसान की जीवनशैली ही बदल गई। पहली लहर की बात करें तो उस दौरान संक्रमण का फैलाव कम हुआ था। लोगों की जानें भी कम गईं थीं। मगर दूसरी लहर में संक्रमण तेजी के साथ फैला और जिले में करीब 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 6700 से अधिक कोरोना पॉजिटिव केस मिले थे। हालांकि अप्रैल और मई के बाद दस जून से जिले में संक्रमण का ग्राफ कम हो गया। लेकिन संभावित तीसरी लहर को लेकर लोग डरे हुए हैं। इसकी वजह से लोग कोविड फोबिया (एंजायटी) के शिकार होने लगे हैं। उन्हें अपने रोजगार और भविष्य की चिंता सताने लगी है। ऐसे में लोग मनोरोगी बनने लगे हैं। पिछले तीन से चार माह में मनोरोगियों की संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है। सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल तक मरीज दिखाने के लिए पहुंच रहे हैं।
पहले और अब में मरीजों की संख्या में काफी अंतर
जिला अस्पताल में बने मन कक्ष में सामान्य दिनों में दस से बारह दिनों सिर्फ 20-25 मरीज ही दिखाने के लिए पहुंचते थे। लेकिन अब यहां 30-45 तक मरीज आ रहे हैं। अगर बीते आठ दिन की बात करें। तो करीब 25 से अधिक मरीज काउंसिलिंग के लिए पहुंचे हैं। मनोचिकित्सक पल्लवी सक्सेना के मुताबिक लोगों को तीसरी लहर को चिंता सता रही है। वह दिन-रात सिर्फ अपने भविष्य और रोजगार को लेकर सोचते रहते हैं। ऐसे में यह लोग एंजायटी के शिकार हो रहे हैं। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा आ रही है जिनके परिवार में कोरोना से मौत हुई है या फिर किसी को संक्रमण काल के बीच हुए आर्थिक नुकसान हुआ है। ऐसे में लोग ही आ रहे हैं।
ये भी बनी मनोरोग बढ़ने की वजह
- संक्रमण से परिवार में मौत होना
- अपनों से दूर रहना
- बीमार का हालचाल न लेना
- कार्यक्रमों में न आना
- आर्थिक चोट पहुंचना
- दवाइयों का खर्च का बढ़ना
- मानसिक डर और भविष्य के बारे में अधिक सोचना
- बच्चों की शिक्षा का दबाव
- तीसरी लहर में बच पाएंगे कि नहीं
- पोस्ट कोविड का दिमाग पर असर
- हल्का बुखार आने पर कोरोना के बारे में सोचना
ये लक्षण लेकर पहुंच रहे मरीज
- सीने में दर्द
- कमर में दर्द
- पैरों में दर्द
- स्वाद न आना
- अजीब सी गंध आना
- भूख न लगना
- नींद न आना
- काम में मन नहीं लगना
डॉक्टर की सलाह
कोविड फोबिया को लेकर मनोचिकित्सक पल्लवी सक्सेना का कहना है कि ऐसे लोग अधिक समय तक अकेले न रहेे। परिवार के सदस्य आपस में संवाद बनाए रखें। ताकि वह अकेलापन महसूस न करें। संक्रमित से शारीरिक दूरी रखें। अपने को व्यस्त रखें। सुबह उठकर टहलने के लिए और व्यायाम करें। समय से सो जाएं। ताकि आपकी नींद पूरी हो सके। किसी भी चीज के बारे में लगातार न सोचे।
कोरोना को लेकर अभी भी लोगों के मन में डर बना हुआ है, मगर उन्हें डरना नहीं चाहिए। किसी भी चीज के बारे में अधिक सोचने पर एंजायटी के शिकार हो सकते हैं। कोविड फोबिया की दिक्कत 25 साल से लेकर 60 साल तक के लोगों में आ रही है। मन कक्ष में आने वाले सभी मरीजों की काउंसिलिंग की जा रही है। - पल्ल्वी सक्सेना, मनोचिकित्सक
जिला अस्पताल के मन कक्ष में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ये वृद्धि कोरोना के कारण हुई है। लोगों को तीसरी लहर का डर सत्ता रहा है। ऐसे में लोग बस सावधानी बरतने की जरूरत है। वह डरे नहीं बल्कि चुनौतियों का सामना करें। टीकाकरण अवश्य कराएं। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ