पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल आने वाली गर्भवती और महिलाओं को जांच और इलाज के नाम पर लाइन में धक्का-मुक्की और घंटों इंतजार मिल रहा है। एक ही ओपीडी कक्ष में करीब चार सौ महिलाओं को परामर्श देने की व्यवस्था महिलाओं का दर्द बढ़ा रही है। कक्ष के गेट पर घंटों इंतजार के बाद भी महिलाओं को समुचित इलाज नहीं मिल रहा। अल्ट्रासाउंड के लिए एक माह के इंतजार के चलते गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच भी आधी-अधूरी रहती है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला महिला अस्पताल (एमसीएच विंग) में अव्यवस्थाएं रहती हैं। अस्पताल में गर्भवती समेत करीब तीन से चार सौ महिलाओं की ओपीडी होती है। आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के चलते इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे महिला अस्पताल में ओपीडी कक्ष संख्या-21 के बाहर लगभग 20 महिलाएं परामर्श के लिए इंतजार कर रहीं थी। कक्ष में सिर्फ एक गायनी चिकित्सक और जूनियर रेजिडेंट की ड्यूटी के चलते गर्भवती महिलाओं को भी कतार में लगना पड़ा। अल्ट्रासाउंड कक्ष के गेट के बाहर बैठी कुछ महिलाएं पूर्व में एक माह बाद की तारीख मिलने के चलते सोमवार को अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची थीं। अन्य महिलाओं को तारीख दी जा रही थी। पैथालॉजी लैब में कर्मचारियों के अभाव में गेट पर भीड़ जमा थी, हालांकि महिलाओं की खून और यूरिन जांच हो रही थी।
नौ माह की गर्भवती को मिली एक माह बाद की तारीख
जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के इलाज में हीलाहवाली को लेकर सीएमएस और स्टाफ पर कई बार आरोप लग चुके हैं। सोमवार को नौ माह की गर्भवती नसरीन अल्ट्रासाउंड कराने आई थी। अल्ट्रासाउंड कक्ष में कार्यरत कर्मचारियों ने अगले माह की तारीख देकर उसे टरका दिया। महिला अपने अल्ट्रासाउंड के लिए इधर -उधर भटकती नजर आई।
महीनों से खराब पड़ी लिफ्ट बनी समस्या
पांच साल से खराब पड़ी लिफ्ट को लगभग चार माह पहले ठीक कराया था। पहली बार विशेष ट्रायल के लिए चढ़े जिले के कुछ अधिकारी बीच में ही लिफ्ट बंद होने के चलते अटक गए। इसके बाद भी लिफ्ट का संचालन दोबारा नहीं हो पाया। इसका खामियाजा गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें सीढ़ियां चढ़कर ओपीडी जाना और सीढ़ियों से ही आना पड़ रहा है।
एमसीएच में एक और अल्ट्रासाउंड मशीन की आवश्यकता
एमसीएच विंग में रोजाना 25-30 महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। करीब 100 गर्भवती रोजाना महिला अस्पताल पहुंचती है। उन्हें एक माह बाद की तारीख मिलती है। इससे इलाज प्रभावित होता है। एक और अल्ट्रासाउंड मशीन लगने से गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड समय से हो सकेंगे।
गर्भवती महिलाओं को नियमित परामर्श मिलता है। जांच आदि में भी कोई समस्या नहीं है। ओपीडी कक्ष बढ़ाने को लेकर विचार किया जाएगा।
डॉ. राजेश कुमार, अधीक्षक जिला महिला अस्पताल
कतार में लगकर परामर्श लेंती महिलाएं। संवाद
कतार में लगकर परामर्श लेंती महिलाएं। संवाद
कतार में लगकर परामर्श लेंती महिलाएं। संवाद