कलीनगर। गोमती उद्गम स्थल पर चल रहे गोमती महोत्सव का समापन सम्मान समारोह के साथ सोमवार को किया गया। देर शाम रामलीला में रावणवध की लीला का मंचन किया गया। इसमें वृंदावन के कलाकारों ने सुंदर प्रस्तुति पेश की। देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ मंचन देखने के लिए उमड़ी रही।
शरदकालीन गोमती महोत्सव के अंतिम दिन स्कूली बच्चों ने लघु नाटक, गायन प्रतियोगिता में भाग लिया। इसमें दहेज प्रथा, पर्यावरण संरक्षण और नदियों के संरक्षण से संबंधित कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके बाद सम्मान समारोह हुआ। इसमें गोमती उत्सव के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वाले स्कूली बच्चों व महोत्सव को सफल बनाने वाले लोगों का सम्मानित किया गया।
एसडीएम देवेंद्र सिंह, तहसीलदार हबीब उर रहमान से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान निर्भय सिंह, शक्ति सिंह, महमूद मियां आदि मौजूद रहे।
देर शाम राम लीला में रावण वध का मंचन किया गया। जिसमें वृंदावन के कलाकारों ने दिखाया कि कुंभकर्ण, मेघनाद एवं अहिरावण के वध के बाद रावण के वंश के लगभग सभी योद्धा समाप्त हो चुके थे, जिसपर रावण ने स्वयं युद्ध में जाने की घोषणा की, लेकिन राजदरबार के लोगों ने बताया कि वर्षों पहले रावण का एक पुत्र मूल नक्षत्र में हुआ था, उसे नदी में बहा दिया गया। जिसे सभी नारांतक के नाम से जानते हैं।
रावण ने जब नारांतक को संदेश भिजवाया तो वह पूरी सेना लेकर लंका पहुंचा और अपने पिता रावण से कहा कि हे पिताश्री आपने भले ही मूल में पैदा होने से मुझे त्याग दिया था, लेकिन वंश की रक्षा के लिए वह श्रीराम-लक्ष्मण से युद्ध करेगा। युद्ध में नारांतक भी मारा गया। इसके बाद श्रीराम ने रावण की नाभि पर बाण मारा, जिससे उसका अंत हुआ।
गोमती महोत्सव में लीला मंचन करते कलाकार।संवाद