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चेयरमैन के परिवार से अभद्रता की जांच तो हो गई, मगर गोकशी की नहीं

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पीलीभीत। नगर पंचायत चेयरमैन ममता गुप्ता के घर के बाहर गाली गलौज और अपशब्दों का प्रयोग कर धमकाने का वीडियो वायरल होने के मामले की जांच तो 24 घंटे में पूरी कर ली गई, लेकिन निलंबित इंस्पेक्टर मनीराम सिंह पर गोमांस तस्करों से साठगांठ के लगे आरोपों की सत्यता जानने को तीन दिन बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। पूरा घटनाक्रम गोकशी के धंधे से जुड़ा होने के बावजूद पुलिस विभाग के अफसर इस अहम तथ्य को दबाने में जुटे हैं।
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सोमवार रात को सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए थे। इसमें तत्कालीन जहानाबाद इंस्पेक्टर मनीराम सिंह पुलिस बल के साथ नगर पंचायत चेयरमैन के घर के बाहर सिविल ड्रेस में गाली गलौज करते दिखे थे। चेयरमैन और उनके पति से अपशब्दों का प्रयोग कर धमकाने के मामले का वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद भी पुलिस की सक्रियता देखने लायक थी। एक स्थानीय व्यापारी की ओर से दी गई तहरीर पर पुलिस ने चेयरमैन समेत उनके परिवार के पांच सदस्यों पर छेड़छाड़ और हमला करने की रिपोर्ट तुरंत दर्ज कर ली। सीओ ने 24 घंटे में पूरे मामले की जांच भी पूरी करा ली और इंस्पेक्टर को निलंबित भी किया जा चुका है। मगर इस पूरे विवाद की जड़ में छिपे गोकशी पर कुछ नहीं किया गया। चेयरमैन पति दुर्गाचरन गुप्ता उर्फ अन्ना भइया ने पूरे विवाद के पीछे की मुख्य वजह गोकशी से पुलिस को होने वाली आमदनी बताई थी। चेयरमैन का आरोप था कि इंस्पेक्टर मनीराम सिंह स्थानीय थाने में गोकशी करा रहे थे। बीते दिनों परेवावैश्य गांव में 60 हजार रुपये लेकर तस्करों को गोकशी का ठेका दिया गया था। हालांकि इंस्पेक्टर ने भी चेयरमैन पति को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए गोकशी के धंधे में लिप्त बताया था।
सीओ ने केवल चेयरमैन से गालीगलौज वाले वीडियो की ही जांच की। केवल एक बिंदु पर ही जांच करने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। जहानाबाद समेत आस-पास के कुछ गांव गोकशी के धंधे को लेकर अलग पहचान रखते हैं। जहानाबाद के साथ ही बरखेड़ा, अमरिया, बिलसंडा और पूरनपुर गोतस्करी के गढ़ माने जाते हैं। यहां के गांवों में गोकशी करने वाले थानों में हर महीने एक मुश्त रकम पहुंचाते हैं। छह माह पहले भी इसी थाने के एक इंस्पेक्टर गोकशी के आरोपों में ही लाइन हाजिर किए गए थे। उनकी भी गोतस्करों से तगड़ी सांठगांठ बताई गई थी। अब यह इंस्पेक्टर फिलहाल अफसरों की स्पेशल टीम में हैं। एक तरफ योगी सरकार गोकशी को लेकर सख्त है। वहीं दूसरी ओर गोतस्करों को संरक्षण देने में पुलिसकर्मियों पर आरोप लग रहे हैं तो उसकी जांच न कराने की बात भी लोगों के आसानी से गले नहीं उतर रही है।
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इंस्पेक्टर मनीराम सिंह का वीडियो वायरल होने के बाद मुझे जांच मिली थी। इसमें गोकशी के बिंदु पर जांच का जिक्र नहीं था। सिर्फ वायरल वीडियो की सत्यता की जांच होनी थी। वह जांच करने के बाद उसकी रिपोर्ट बनाकर भी दी जा चुकी है। गोकशी की अलग से जांच मिलती है, तो उसे किया जाएगा। - प्रमोद कुमार, सीओ सदर
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