बीसलपुर। गांव खांडेपुर से 24 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कहानी जुड़ी है। इस गांव में गांधी चबूतरा बना है। गांव में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी आंदोलन की रणनीति इसी चबूतरे पर बनाते थे। राष्ट्रीय पर्व आते ही इस गांव के लोगों की यादें ताजा हो जाती हैं।
गांव निवासी क्रांतिकारी रामस्वरूप ने गोरखपुर और अलीगढ़ जाकर क्रांतिकारियों से बम बनाने का तरीका सीखा था। अपने क्षेत्र के क्रांतिकारियों के साथ एक पुल उड़ाने की योजना भी बनाई थी। वह योजना को अंजाम दे पाते इससे पहले ही किसी ने अंग्रेजों से मुखबिरी कर दी और बम विस्फोट करने से पहले ही वह गिरफ्तार हो गए थे।
देवहा नदी की तलहटी में बसे करीब पांच हजार की आबादी वाले इस गांव के क्रांतिकारियों की स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका रही है। गांव के लोग आज भी इस पर गर्व करते हैं। गांव के पूर्व प्रधान शरद पाल सिंह ने बताया कि उनके दादा रामस्वरूप स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बीच कमांडर के रूप में प्रसिद्ध थे।
उस समय उनके गांव के हर घर से अंग्रेजों के खिलाफ बगावती स्वर निकला करते थे। शरद पाल सिंह का दावा है कि पूरे बरेली मंडल के किसी भी गांव को इतने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देने का गौरव प्राप्त नहीं है। गांव में बने गांधी चबूतरे पर सेनानियों के नाम का शिलालेख भी लगा हुआ है।
स्वतंत्रता सेनानियों में रामस्वरूप, चंदन लाल, छोटे लाल, छेदालाल, शिवचरण लाल, प्यारे लाल, सत्यदेव, बांदू लाल, नाथूलाल, रामचरण लाल, बालक राम, सुमेरलाल शामिल हैं। बद्री प्रसाद, बैजनाथ, लालजीत, चोखेलाल, लाहौरी सिंह, सेवाराम, रोशन लाल, रघुनंदन प्रसाद, ख्याली राम, जगदीश प्रसाद, अयोध्या प्रसाद और हुलसी राम आदि स्वतंत्रता सेनानी भी इसी गांव के रहने वाले थे। संवाद
रक्षामंत्री भी आ चुके हैं गांव
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह वर्ष 1997 में खांडेपुर आए थे। उन्होंने उस दौरान जीवित सेनानियों और उनके परिजनों से मिलकर गांव की प्रमुख समस्याओं का निस्तारण करने का आश्वासन भी दिया था। उन समस्याओं का निस्तारण अब तक नहीं हुआ है। राजनाथ सिंह उस समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे।
अंग्रेजों का जुल्म नहीं डिगा पाया
गांव के रामस्वरूप का जन्म पांच जुलाई 1896 को हुआ था। उनका निधन 21 दिसंबर 1984 को हो गया था। उन्होंने पांच बार जेल यात्रा की थी। साढ़े आठ वर्ष कारावास में रहे। आजादी की लड़ाई के दौरान आए दिन इस गांव में पूरे मंडल के स्वतंत्रता सेनानियों की बैठक होती थी। बैठक में लिए निर्णय के अनुसार कोई सेनानी डाक बांटता था। कोई बम बनाता था। शरद पाल ने बताया कि अंग्रेजों ने उनके दादा के नाखूनों में बांस की कीलें ठोकी थीं, लेकिन गोरों का जुल्म उन्हें डिगा नहीं सका।
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देश आजाद होने पर बीसलपुर में निकला था जुलूस
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बीसलपुर। गांव रमभोजा निवासी 90 वर्षीय हजारीलाल दीक्षित ने बताया कि जब देश आजाद हुआ था, उस दिन बीसलपुर में काफी बड़ा जुलूस निकाला गया। बताया कि उस समय वह बीसलपुर में किराये पर कमरा लेकर पढ़ाई करते थे। जुलूस में शामिल लोग भारत माता के जयकारे लगा रहे थे। रास्ते में मिलने वालों को मिठाई खिलाई जा रही थी। उस दिन नगर के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे थे। जुलूस व जनसभा में नगर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के भी काफी लोग आ गए थे। घरों में महिलाओं ने भी ढोलक बजाकर मंगलगीत गए थे। संवाद
बीसलपुर के गांव खांडेपुर का गांधी चबूतरा।संवाद