पीलीभीत। नगर को स्वच्छ और देवहा नदी के पानी को प्रदूषणरहित करने के उद्देश्य से लगाया गया फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) एक साल बाद भी संचालित नहीं हो सका। जुलाई- 2024 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए प्लांट को संचालित करने का प्रयास नगर पालिका के कागजों में चल रहा है। प्लांट की अधिकांश मशीनें खराब होकर जंग खा रहीं हैं। वहीं शहर के नालों की गंदगी देवहा में बहाए जाने के कारण नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है।
नगर पालिका पीलीभीत में 27 वार्ड 49 मोहल्ले हैं। करीब साढ़े तीन लाख आबादी है। स्वच्छता का ध्यान रखते हुए आवासीय और कामर्शियल भवन के सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मल और गंदे पानी के निस्तारण के लिए वर्ष 2022 में एफएसटीपी को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद बरेली जल निगम शहरी की ओर से शहर से सटे देवहा नदी पुल के निकट 5.21 करोड़ की लागत से प्लांट को लगाया गया।
नवंबर 2023 में इसे नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि सात माह तक इसका संचालन हुआ। जुलाई 2024 में आई बाढ़ से प्लांट को नुकसान पहुंचा। बाढ़ के पानी में बहकर आई मिट्टी के ढेर में फंसी कुछ मशीनों के खराब होने की बात कही गई। तब से प्लांट का संचालन ठप है।
एक साल से गंदगी को सीधे नदी में बहाया जा रहा है। हालांकि प्लांट के संचालन को लेकर करीब छह माह पहले 51 लाख रुपये से अधिक धनराशि का प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते प्लांट संचालन के प्रयास सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गए।
स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंक गिरने की बना वजह
नगर पालिका पीलीभीत स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में इस बार प्रदेश में बीते वर्ष की अपेक्षा 106 पायदान तक फिसल गई। इसमें नौगवां पकड़िया में लगा क्षतिग्रस्त एफएसटीपी प्रमुख कारण बना। प्लांट का संचालन न होने से रैंक तो प्रभावित हुई ही, नदी का पानी भी साफ नहीं हो रहा है।
क्षतिग्रस्त एफएसटीपी को दुरुस्त कराने को लेकर पूर्व में एस्टीमेट भेजा गया था। बजट स्वीकृत होने के बाद इसका पुन: संचालन किया जाएगा। शासन से एफएसटीपी के संचालन को लेकर पत्राचार भी किया जा रहा है। - संजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद