पीलीभीत। अभिलेखों में किसान की भूमि किसी अन्य की दर्शाकर उस पर बैंक से ट्रैक्टर के लिए तीन लाख रुपये का लोन निकालने के दो आरोपियों व दो बैंक अधिकारियों के विरुद्ध लगे आरोप साबित न होने पर न्यायालय ने चारों को बरी कर दिया।
अभियोजन के मुताबिक तहसील व जिला पीलीभीत के ग्राम जादौपुर निवासी जसमेर सिंह के नाबालिग पुत्र सुखबाज सिंह ने न्यायालय के आदेश पर थाना गजरौला में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि उन्होंने पांच अप्रैल 2004 को गाटा संख्या 267 रकबा 0.559 हेक्टेयर भूमि क्रय की थी। तहसीलदार के आदेश से भूमि उसके नाम खतौनी में दर्ज हो गई। इधर, थाना कोतवाली सदर के मोहल्ला सरायखाम निवासी मंजीत सिंह व थाना सुनगढ़ी के मोहल्ला नखासा निवासी चरन सिंह ने शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा कैच प्रह्लाद सिंह तौलिया और फील्ड आफिसर केपी सिंह के साथ सांठगांठ करके उसकी भूमि को मंजीत सिंह की बताकर फर्जी खतौनी बनाकर बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा कैच थाना गजरौला से ट्रैक्टर के लिए तीन लाख रुपये का कर्ज एक सितंबर 2005 को निकाल लिया।
जानकारी होने पर उसने इसकी शिकायत थाना गजरौला में की। कार्रवाई न होने पर न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। न्यायालय ने सुनवाई करने के पश्चात गजरौला पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया। तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना में कुलवंत सिंह, मंजीत सिंह व चरन सिंह को दोषी पाते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
अभियोजन के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई कर प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने बैंक प्रबंधक प्रहलाद सिंह तौलिया व फील्ड ऑफिसर के पी सिंह को बतौर अभियुक्त तलब किया। अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह न्यायालय में पेश किए गए। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद चारों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।