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Pilibhit News: सिकुड़ रहा जंगल, प्राकृतिक कॉरिडोर हो रहे नष्ट, भटक रहे हाथी और बाघ

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सोनू सरपंच
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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और सीमित वन क्षेत्र के चलते अब जंगल पर दबाव साफ दिखने लगा है। हालात यह हैं कि बाघ ही नहीं, बल्कि नेपाल से आने वाले हाथी भी प्राकृतिक कॉरिडोर खत्म होने के कारण आबादी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
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जिले में नौ जून 2014 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) घोषित किया गया था। उस समय 71,288 हेक्टेयर वन क्षेत्र में खुटार रेंज के 1736.90 हेक्टेयर को मिलाकर कुल 73024.90 हेक्टेयर क्षेत्र को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। उस दौरान यहां महज 24 बाघ थे। समय के साथ इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ।
पूर्व में जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में यहां 72 बाघ हैं, जबकि नई गणना में यह संख्या 85 के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बाघ को रहने के लिए औसतन 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से 730 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लगभग 36 बाघों के लिए ही पर्याप्त है, जबकि मौजूदा संख्या इससे दोगुने से भी अधिक हो चुकी है।
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वन क्षेत्र की कमी के कारण बाघ और तेंदुए अब जंगल से बाहर निकलकर खेतों और आबादी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। स्थिति यह है कि जंगल से सटे गांवों के साथ-साथ शहर की सीमाओं के नजदीक भी बाघों की मौजूदगी देखी जा रही है। इससे न केवल लोगों में दहशत है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। (संवाद)


हाथियों की बढ़ी सक्रियता, फसलों को बचाना चुनौती

दूसरी ओर नेपाल से आने वाले जंगली हाथी भी प्राकृतिक कॉरिडोर नष्ट होने के कारण भटककर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। माला, बराही और महोफ रेंज के जंगलों के आसपास पिछले कुछ महीनों में हाथियों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। हाथियों के झुंड अब तक सैकड़ों एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा चुके हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्ग (कॉरिडोर) खत्म होने से यह समस्या और गंभीर हुई है।



नौ साल में दोगुने से ज्यादा हुए बाघ
वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व बनने के समय यहां करीब 24 बाघ थे। वर्ष 2018 तक इनकी संख्या बढ़कर 65 से अधिक हो गई। इसके बाद 2023 में यह आंकड़ा 71 तक पहुंच गया। अब नई गणना में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। बढ़ती बाघ संख्या और सीमित वन क्षेत्र के बीच संतुलन बनाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।


विभाग की ओर से वन्यजीवों की निगरानी, जागरूकता और सुरक्षा उपायों पर नियमित काम किया जा रहा है। जल्द ही संसाधनों को और बेहतर किया जाएगा। - मनीष सिंह, डीएफओ





पिछले कई माह से क्षेत्र में हाथियों की दस्तक है। हाथी लगातार गन्ने और गेहूं की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। विभाग सिर्फ निगरानी और जागरूकता तक सीमित है। - सोनू सरपंच, निवासी सिरसा सरदहा थाना गजरौला











करीब सात गांव की सीमा में पिछले चार माह से हाथियों की चहलकदमी देखी जा रही है। हाथी मेरी कई बीघा में फैली गन्ने की फसल को बर्बाद कर चुके हैं। बावजूद इसके विभाग ठोस इंतजाम नहीं कर पा रहा। - पूरन सिंह, सिरसा

सोनू सरपंच

सोनू सरपंच

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