पीलीभीत। जंगलों में लगने वाली आग से जहां वन संपदा नष्ट होती है, वहीं कई पशु-पक्षियों की मौतें भी हो जाती है। अब जंगल में लगने वाली आग पर कैसे काबू पाया जाए, इसको लेकर विश्व प्रकृति निधि की ओर से वनकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
गर्मी की दस्तक के साथ ही जंगल के अंदर आग लगने की घटनाएं प्रकाश में आने लगती है। इससे जहां बड़ी संख्या में वन संपदा, जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचता है, वहीं वायु प्रदूषण की समस्या भी बढ़ जाती है। हालांकि इसको लेकर वन विभाग द्वारा फायर सीजन के दौरान रेंजों में फायर लाइन बनाने के साथ वनकर्मियों को विशेष निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जाती है। हालांकि अधिकांश आग लगने की घटनाओं का कारण पता नहीं चल पाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि जंगल में आग की घटनाएं फायर सीजन से पहले भी होने लगती है। संसाधनों की कमी से जूझ रहे पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास आग से बचाव के लिए अत्याधुनिक संसाधन नहीं है। ऐसे में सीमित वनकर्मी जंगलों में लगने वाली आग पर कैसे काबू पाए, इसको वन अग्नि प्रबंधन के तहत एक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से वनकर्मियों को सबसे पहले आग की पहचान कर काबू पाने के तौर तरीकों से टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण विश्व प्रकृति निधि की ओर से दिया जाएगा।
जंगलों में लगने वाली आग से बड़े पैमाने पर वन संपदा और जीव-जंतुओं को नुकसान होता है। वन अग्नि प्रबंधन के तहत एक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके माध्यम से वनकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- नरेश कुमार, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी, विश्व प्रकृति निधि