बाढ़ आने पर
गांव में पानी भरने में सबसे ज्यादा दिक्कत पेयजल की होती है। इसके लिए
शासन ने जिले के सभी बाढ़ प्रभावित गांवों को चिह्नित कर उनमें कम से कम
एक-एक हैंडपंप को ऊंचाई पर लगवाकर फाउंडेशन बनवाने के निर्देश दिए हैं।
इससे गांव में पानी भरने पर सभी को शुद्ध पानी मिल सके। इसके लिए एडीएम की
अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है।
नदियों से घिरे इस जनपद
में बरसात के समय नदियों का जलस्तर बढ़ने से हर साल कई गांव बाढ़ की चपेट
में आ जाते हैं। गांव में पानी भरने से हैंडपंप पानी में डूब जाते हैं।
इससे पानी दूषित हो जाता है। इस समस्या को ध्यान में रखकर शासन ने बाढ़
ग्रस्त गांवों को चिह्नित कर उनमें कम से कम एक-एक हैंडपंप ऊंचाई पर लगवाने
के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव चंचल तिवारी का पत्र शासन को प्राप्त
हो गया है। इसमें कहा गया है कि एडीएम की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय
कमेटी गठित कर गांव को चिह्नित किया जाना है। बाढ़ की स्थिति बनने से पहले
संबंधित गांव में हैंडपंप को ऊंचा कर लिया जाएगा। प्रमुख सचिव के पत्र के
आधार पर डीएम ने एडीएम की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें
एडीएम के अलावा डीपीआरओ, डीडीओ, अधिशासी अभियंता जलनिगम और आरईएस को रखा
गया है।
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बहराइच में सफल रहा था प्रयोग
बाढ़ के समय ग्रामीणों
को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को कराई इस कवायद को पहले पायलट प्रोजेक्ट के
रूप में बहराइच में प्रयोग किया गया था। जहां यह प्रयोग काफी सफल रहा और
बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को पानी की किल्लत से नहीं जूझना पड़ा। बहराइच की
सफलता के बाद इसे प्रदेश के सभी बाढ़ प्रभावित गांव में लागू किया जा रहा
है।
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बाढ़ प्रभावित गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को एक-एक
हैंडपंप को ऊंचे स्थान पर लगाकर फाउंडेशन बनाया जाना है। इसके लिए गांव का
चयन किया जा रहा है।
- वीपी सक्सेना, डीपीआरओ।