पीलीभीत। लकड़ी मंडी में मंगलवार रात दो बजे शार्ट सर्किट होने से आग लग गई। आग की चपेट में आने से लकड़ी की तीन टालों में लपटें उठने लगीं। आसपास अफरातफरी मच गई। सूचना पर पहुंची दमकल ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अग्निकांड में करीब पचास लाख का नुकसान हुआ है।
शहर के मोहल्ला मस्जिद पठानी निवासी मोहम्मद सईद खां उर्फ मुन्ने की बरेली रोड पर घन्नई ताल के पास लकड़ी मंडी में टाल है। वह मंगलवार को शाम रोजाना की तरह टाल बंद कर घर चले गए। इसी दौरान रात करीब दो बजे शार्ट सर्किट से टाल में आग लग गई। आग के विकराल रूप लेते ही मोहम्मद शरीफ खां और शमीउल्ला से किराए पर लेकर टाल चला रहे इरशाद के यहां लकड़ी ने आग पकड़ ली। इसी दौरान कोतवाली पुलिस की गाड़ी गश्त के लिए उधर से गुजरी। चालक राजीव कुमार ने टाल में आग की लपटें उठती देख गाड़ी रोक दी। गाड़ी में सवार पुलिस कर्मियों ने आस पास के लोगों को जगाया और दमकल को सूचना दी। पौन घंटे बाद दमकल की टीम गाड़ी के साथ पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया। टाल के मालिक भी पहुंचे। उनके परिजन बुझाने के लिए आसपास के लोगों के साथ जुटे। आग विकराल थी। बीसलपुर, पूरनपुर की गाड़ियां बुलाकर बमुश्किल काबू पाया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे तक आग पूरी तरह बुझाई गई। तब आसपास के लोगों ने राहत महसूस की। क्योंकि आग बढ़ती तो आसपास की दूसरी टालें भी खतरे में आ जातीं।
सबसे ज्यादा 30 लाख का नुकसान मुन्ने की टाल पर हुआ
मोहम्मद सईद की टाल में आग से साल, सागौन, शीशम, कुकाट की कीमती लकड़ी जल गई। मुन्ने की टाल में मशीन और अन्य सामान समेत करीब 25 से 30 लाख का नुकसान बताया जा रहा है। इसके अलावा इरशाद की टाल से जलौनी लकड़ी समेत काफी नुकसान हुआ है। करीब पांच लाख रुपये का नुकसान है। मोहम्मद शरीफ खां की टाल पर करीब दस लाख रुपये की लकड़ी का नुकसान बताया जा रहा है। इस तरह से तीनों टाल का करीब 50 लाख के आस पास नुकसान बताया जा रहा है।
शुगर मिल से पानी लेकर सात घंटे दौड़तीं रहीं दमकल गाड़ियां
शहर में नगरपालिका की ओर से पानी की पाइप लाइन डालने के दौरान जगह-जगह फायर हाईडेंट बनाए जाते हैं। मगर शहर में कोई फायर हाईडेंट नहीं बनाए गए। इसी वजह से मंगलवार रात अग्निकांड के दौरान दमकल की गाड़ियों घटना स्थल से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित शुगर मिल से पानी लेकर आईं। पानी लेने में एक मशीन को करीब आधे से पौन घंटे लगा रहा था। करीब तीन बजे आग बुझाने का काम शुरू हुआ था। आग पर काबू करने में दमकल टीम चार घंटे तक लगी रही, तब कहीं जाकर आग पर काबू पाया जा सका। सुबह साढ़े दस बजे गाड़ियां वापस लौटीं।
लकड़ी मंडी में 60 दुकानें, फिर भी नहीं कोई इंतजाम
शहर की लकड़ी मंडी में टाल और अन्य दुकानें 60 हैं। इसके बाद भी कोई अग्निकांड को लेकर कोई विशेष इंतजाम नहीं है। नगर पालिका ने फायर हाईडेंट नहीं बनाए, जिम्मेदार सामाजिक वानिकी रजिस्ट्रेशन के दौरान फायर एनओसी लेने की भी जहमत नहीं उठाते। दुर्घटना के आसार बने रहते हैं पर मंगलवार को गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
कंट्रोल से पौने तीन बजे सूचना मिली थी। 15 मिनट में गाड़ी लेकर पहुंच गए थे। एक घंटे में पूरनपुर और बीसलपुर से भी गाड़ियां आ गई थीं। साढ़े सात घंटे में काबू बुझाने में लग गए थे। - अनिल कुमार, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी