फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेजी से बढ़ रहा सड़क हादसों में मौतों का ग्राफ

Tue, 03 May 2016 11:24 PM IST
ब्यूरो  पीलीभीत।
विज्ञापन
मौत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ग्लोबल रोड सेफ्टी वीक पर विशेष 
विज्ञापन

चार महीनों में हुई 60 लोगों की मौत
पिछले साल इस अवधि में मरे थे 40 लोग 
जिले में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। पिछले साल के शुरुआती चार महीनों की तुलना में इस साल 20 मौतें ज्यादा हुई हैं। हादसों के पीछे मुख्य वजह सुरक्षा के प्रति लापरवाही और यातायात नियमों का पालन न करना माना जा रहा है। यदि लोग यातायात नियमों का पालन करें तो सड़क हादसों के ग्राफ में कमी आ सकती है।
यातायात पुलिस और परिवहन विभाग हादसों पर अंकुश लगाने के लिए आए दिन अभियान चलाते हैं। लोगों को यातायात नियमों की जानकारी देकर उनका पालन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए साइन बोर्ड, होर्डिंग्स आदि लगाए गए हैं। इसके बाद भी सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2015 में जिले में करीब 460 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। यातायात पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इनमें 128 लोगों की जान गई। 232 लोग गंभीर घायल हुए। जनवरी 2015 से 30 अप्रैल 2015 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन चार महीनों में 40 लोगों की जान गई और 64 लोग घायल हुए लेकिन इस साल यह आंकड़ा बढ़ गया। इस साल इस अवधि में 60 लोगों की मौत हुईं और 70 लोग घायल हुए। 
विज्ञापन


यातायात नियमों की अनदेखी पड़ती है भारी
तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी ही अक्सर हादसे का सबब बन जाती है। यातायात पुलिस का मानना है कि यदि लोग नियमों का पालन कर नियंत्रित गति में वाहन चलाए तो हादसों से बचा जा सकता है। 

हेलमेट की अहमियत समझनी होगी
अस्पताल के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो सर्वाधिक मौतें बाइक्स के हादसों के दौरान लोगों के सिर में चोट लगने से हुई हैं। इससे बचाव के लिए बाइक सवार को उच्च गुणवत्ता का हेलमेट पहना चाहिए। हेलमेट के पीछे की ओर रात में चमकने वाली पट्टी भी होनी चाहिए ताकि पीछे से आ रहे वाहन चालक को उसकी जानकारी हो सके।  
विज्ञापन


विभाग समय-समय पर गोष्ठियां कर लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करता है।  यदि लोग वाहनों को चलाते समय सावधानी बरतें और नियमों का पालन करें तो काफी हद तक हादसों को रोका जा सकता है। 
- मनोज बिरला, टीएसआई
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें