पीलीभीत। दो साल बीतने के बाद भी जिले के चार लाख से अधिक किसानों में सिर्फ 2.67 लाख की फॉर्मर रजिस्ट्री ही हो सकी है। एक लाख 34 हजार किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री अब तक शेष है। इसकी वजह अंश निर्धारण, खतौनी में नाम दर्ज न होना, आधार व अन्य दिक्कतें बताई जा रही हैं। किसानों की ओर से भी सक्रियता से प्रयास न करने की बातें कही जा रही हैं।
किसानों के विवरण को डिजिटल तरीके से सुरक्षित करने के लिए शासन की ओर से किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री बनाए जाने के निर्देश जारी हुए हैं। आईडी बनाने की प्रक्रिया करीब दो साल पहले शुरू की गई थी। विभागीय अफसर फॉर्मर रजिस्ट्री कराए जाने के लिए जोर दे रहे है। जिले में करीब 4.20 लाख किसान हैे। करीब 2.67 लाख किसानों को फाॅर्मर रजिस्ट्री के लिए पंजीकरण किया जा चुका है। करीब 1.34 लाख किसानों का पंजीकरण नहीं किया जा सका है। नए वित्तीय वर्ष में इन किसानों को शासन स्तर से दी जाने वाले योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसके बाद भी विभाग की ओर से किसानों का पंजीकरण नहीं कराया जा सका है। संवाद
दो साल में चार बार बढ़ाई गई मियाद
फॉर्मर रजिस्ट्री कराए जाने के लिए शासन से आदेश जारी हुआ है। करीब दो साल पूर्व शुरू हुई योजना की अंतिम तारीख चार बार बढ़ाई जा चुकी है। इसके बाद भी विभाग इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया है। ऐसे में जिले के काफी किसान शासन स्तर की योजनाओं से वंचित रह जाएंगे।
-
आधार और खतौनी में नाम भिन्नता भी बन रही समस्या
अफसरों का दावा है कि फॉर्मर रजिस्ट्री के लिए लगातार विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन आधार और खतौनी में नाम की भिन्नता व अन्य समस्याएं भी फॉर्मर रजिस्ट्री में सामने आ रही है।
किसानों को नहीं मिल सकेगा इन योजनाओं का लाभ
फॉर्मर रजिस्ट्री न होने से शासन स्तर से चलाई जा रही सम्मान निधि योजना, खाद, बीज सहित अन्य शासन स्तरीय योजनाओं से किसान वंचित रह जाएंगे।
फॉर्मर रजिस्ट्री के लिए शासन से आए आदेश के बाद लगातार प्रयास किया जा रहा है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। करीब दो लाख से अधिक किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री करा दी गई। शेष रह गए किसानों की भी जल्द ही फॉर्मर रजिस्ट्री करा दी जाएगी।
- राम मिलन परिहार, उपनिदेशक कृषि।