लाभार्थी सूची में हेराफेरी करने की शिकायतेें
मऊ शाहजहांपुर पहुंचे एडीओ, लाभार्थियों से मिले
अल्हागंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत मऊ शाहजहांपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के पात्र लाभार्थियों की सूची में हेराफेरी के मामले में प्रशासनिक जांच शुरू होे गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायताें के आधार पर सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) ने गांव जाकर लाभार्थियों और शिकायतकर्ताओं से संपर्क साधा। आरंभिक जांच से पता चला कि शिकायतकर्ताओं ने अपने ही नाम वाले लाभार्थियोें का हक मारने का प्रयास किया और उनके परिवार गांव में निवास भी नहीं कर रहे हैं।
इसलिए शुरू हुई प्रशासनिक जांच
खुद को मऊ शाहजहांपुर गांव का निवासी बताने वाले तसब्बुर पुत्र मुन्ना, रब्बन पुत्र शाहनवाज, महरुन्निसा पत्नी सलीम, अच्छी बी पत्नी इसराइल, अल्ताफ पुत्र शानवाज, मुसब्बर पुत्र रुस्तम शाह और दिलशाद पुत्र बाबू शाह ने शपथ पत्र सहित मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर कहा था कि वे सभी मऊ शाहजहांपुर के मूल निवासी हैं। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास स्वीकृत हुए। ग्राम प्रधान ने 45 लोगों का सत्यापन दिया और उसमें 16 आवास स्वीकृत हुए। स्वीकृत आवासोें में छह अनुसूचति जाति और दस अल्पसंख्यकों के हैं, लेकिन सत्यापन में उनके बैंक खाता नंबर, फोटो और आधार कार्ड हेेराफेरी करके बदल दिए। शिकायतकर्ताओं के अनुसार ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी उनके नाम से अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर आवास की पहली किश्त के 40-40 हजार रुपये हड़प लिए। चूंकि, स्थलीय सत्यापन के बाद आवास लाभार्थियोें की वेबसाइट पर डाली गई सूची और आधार नंबर में फेरबदल संभव नहीं है, इसलिए अधिकारियों ने इन शिकायतों पर संदेह करते हुए जांच कराने का निर्णय किया।
बाहर रह रहे हैं कई शिकायतकर्ता
जांच अधिकारी/एडीओ कोआपरेटिव अश्विनी पांडेय शिकायतकर्ताओं के बयान लेेने गांव मऊ शाहजहांपुर पहुंचेे तोे यह जानकर हैरान रह गए कि सभी सात शिकायतकर्ता आवासों के वास्तविक लाभार्थियों के मिलते-जुलते नामों वाले हैं। चूंकि, वेबसाइट पर डाली गई सूची में असली लाभार्थियों के पिता/पति के नामों का उल्लेख नहीं किया गया। इसलिए लाभार्थी सूची की इसी खामी का लाभ उठाते हुए शिकायतें की गई हैं। एडीओ पांडेय को यह भी पता चला कि दिलशाद रोजी-रोटी कमाने के लिए ज्यादातर दिल्ली में रहते हैं और उनका परिवार अल्हागंज में रह रहा है।
जांच में और भी कई झूठ सामने आए
मामलेे की अब तक हुई जांच में अन्य कई झूठ भी सामने आए हैं। मसलन, तसब्बुर, रब्बन, मेहरुन्निसा आदि के पूर्व प्रधान मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के साथ उनके नाम राशन कार्ड बनवा दिए, लेकिन यह लोेग गांव में नहीं रहते। वर्तमान प्रधान ईश्वर दयाल के अनुसार इन्हें सिर्फ प्रधानी चुनाव के दौरान वोट लेने के लिए बुला लिया जाता है। शिकायतकर्ता अच्छी बी का परिवार फर्रऊखाबाद के अमृतपुर में रह रहा है। आवास के लिए लाभार्थी चयन को बुलाई गई ग्राम पंचायत की बैठक में भी यह लोग नहीं आए। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शिवालय शर्मा के अनुसार मुख्य शिकायतकर्ता दिलशाद का नाम गांव के परिवार रजिस्टर में भी दर्ज नहीं है जो कि लाभार्थी चयन का एक महत्वपूर्ण अभिलेख माना जाता है।
लाभार्थी सूची आधार कार्ड आधारित बनाई गई है और किसी भी लाभार्थी की फाइल खोलने पर अंदर पूरा ब्यौरा दर्ज मिलेेगा। इस प्रकरण में जांच होने तक सभी लाभार्थियों का भुगतान रोक दिया गया है। जांच में शिकायतकर्ताओं को वास्तविक लाभार्थियों के आवास हड़पने का दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-अजय प्रकाश, परियोजना निदेेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण