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करोड़ों खर्च के बाद भी बढ़ रहा कुपोषण

Fri, 16 Dec 2016 10:56 PM IST
मुनिराज सिंह पीलीभीत।
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malnutrition - फोटो : अमर उजाला
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एक साल में आठ हजार बढ़ गई अतिकुपोषित बच्चों की संख्या
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कुपोषण से मुक्ति को सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी जिले में कुपोषण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। वजन दिवस के दौरान प्राप्त आंकड़े कुछ ऐसा ही संकेत कर रहे हैं। पिछले एक साल में जिले में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 14 हजार से बढ़कर 22 हजार हो गई है।
कुपोषण से निजात दिलाने के लिए राज्य पोषण मिशन एवं अन्य योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार के अलावा बच्चों को हॉट कुक और गर्भवती महिलाओं को हौसला पोषण योजना के माध्यम से दोपहर को भोजन दिया जाता है, जिसमें घी, दूध व फल आदि शामिल हैं। वहीं कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है।
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पिछले सप्ताह शासन के निर्देश पर चलाए गए वजन दिवस में जो आंकड़े सामने आए हैं वे चौकाने वाले हैं। जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या पहले से 57 प्रतिशत बढ़ गई है। आंकड़ों की बात करें तो तीन दिन चले अभियान में जिले के 1900 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 2.04 लाख बच्चों का वजन किया गया। इनमें 1.47 लाख सामान्य, 33.9 हजार कुपोषित और 22.64 हजार अतिकुपोषित बच्चे पाए गए हैं। 

अचानक कैसे बढ़ गए अति कुपोषित बच्चे
पिछले वर्ष सितंबर में हुए वजन दिवस में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 14617 थी। प्रति माह कुपोषित बच्चों की रिपोर्ट भी जिला मुख्यालय के माध्यम से शासन को भेजी जाती है। इस रिपोर्ट में अति कुपोषित बच्चों की संख्या लगातार कम होना दर्शाया गया। यदि पिछले तीन माह (सितंबर से नवंबर) की बात करें तो अति कुपोषित बच्चों की संख्या क्रमश: 4.15 हजार, 3.90 हजार व 3.68 हजार थी, लेकिन यह संख्या हाल ही में भेजी गई रिपोर्ट में एकाएक बढ़कर 22 हजार को पार कर गई। आखिर अचानक यह संख्या कैसे बढ़ गई यह बड़ा सवाल है।
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वजन दिवस के आंकड़ों की स्थिति
जिले में कुल बच्चों की संख्या    205977
वजन किए गए बच्चे        204541
सामान्य बच्चों की संख्या        147995
कुपोषित बच्चों की संख्या        33905
अतिकुपोषित बच्चों की संख्या    22641

गत वर्ष जिले में लगभग नौ प्रतिशत अतिकुपोषित  बच्चे पाए गए थे जबकि शासन की रिपोर्ट के अनुसार अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 12.9 प्रतिशत है। इसके चलते इस बार पूरी सतर्कता के साथ वजन लिया गया है। जिससे सही आंकड़े सामने आए हैं।
राजकपूर, डीपीओ 
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