केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी पर वनकर्मी की पिटाई के
मामले का पटाक्षेप हो गया है। बैकफुट पर आए वनकर्मी ने केंद्रीय मंत्री से
वार्ता के बाद समझौता कर गजरौला थाने पुलिस से कार्रवाई न करने को
प्रार्थनापत्र दिया है।
10 मई को गढ़ा रेंज पर तैनात निकासी मुंशी
रूपलाल वर्मा ने पूरनपुर से लौट रही केंद्रीय मंत्री पर जंगल में आग लगने
का कारण पूछने के दौरान अभद्रता कर पीटने का आरोप लगाया था। इस मामले की
तहरीर गजरौला थाने को दी गई थी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
इसके बाद वनकर्मी ने स्थानीय अधिकारियों के साथ ही लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री
दरबार में भी गुहार लगाई थी। बुधवार को आईजी सिविल डिफेंस अमिताभ ठाकुर ने
भी पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कार्रवाई की बात कही थी। इससे उम्मीद की जा
रही थी कि बृहस्पतिवार को कुछ कार्रवाई हो सकती है लेकिन केंद्रीय मंत्री
के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को लखनऊ तक पहुंचने वाले वनकर्मी रूपलाल वर्मा
बृहस्पतिवार को बैकफुट पर आ गए। केंद्रीय मंत्री के प्रतिनिधियों के
माध्यम से उन्होंने केंद्रीय मंत्री से वार्ता कर इस मामले में समझौता कर
लिया। इसके बाद वह केंद्रीय मंत्री के प्रतिनिधियों के साथ दोपहर बाद
गजरौला थाने पहुंचे और पुलिस को लिखित समझौतानामा दिया। इस मामले में
इंस्पेक्टर गजरौला अशोक बुद्धप्रिय ने बताया कि वनकर्मी रूपलाल ने लिखित
समझौता नामा लिखकर दिया है। इस लिए इस कार्रवाई को यहीं समाप्त कर दिया गया
है।
समझौता नामा
गजरौला पुलिस को दिए समझौता नामा में रूपलाल
ने लिखा है कि 10 मई को केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से जंगल में आग लगाए
जाने के संबंध में कुछ कहासुनी एवं मनमुटाव हो गया था जिसकी तहरीर में थाने
में दी थी। अब उसकी केंद्रीय मंत्री से वार्ता के बाद गलत फहमी और मनमुटाव
दूर हो गया है। अब वह अपने शिकायतीपत्र पर कोई कार्रवाई करना अथवा बल देना
नहीं चाहता।