पीलीभीत। तराई क्षेत्र में टाइगर रिजर्व से सटे 22 किलोमीटर लंबे शारदा डैम से प्रवासी पक्षी मुंह मोड़ने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों से यहां विदेशी मेहमानों की आमद में कमी आई है। डैम में पहले की तरह मेहमान पक्षियों की आवाज अब नहीं सुनाई देती हैं। विशेषज्ञ संख्या में कमी के पीछे भोजन की कमी और सिल्ट के साथ डैम के काफी क्षेत्र में उगी बड़ी घास को कारण मान रहे हैं।
यह डैम पिछले कई वर्षों से शरद ऋतु में आने वाले मेहमान पक्षियों और पहाड़ी क्षेत्र के प्रवासी पक्षियों को लेकर काफी प्रसिद्ध रहा है, पिछले कुछ वर्षों से इनकी संख्या लगातार घट रही है। प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत बना शारदा डैम मरम्मत के अभाव में लगातार जर्जर होता जा रहा है। वर्ष 1982 में डैम को खाली कर भीतरी हिस्से की सफाई कराई गई थी। इसके बाद से आज तक सफाई नहीं हो सकी। इसके चलते डैम के कई हिस्सों में घास उग आई है।
डैम का काफी भाग सिल्ट से भी पट गया है। इधर ठंड बढ़ते ही प्रवासी पक्षियों की आमद भी बढ़ जाती है। डैम की जर्जर हालत और बड़ी घास उगने से छोटी मछलियों की किल्लत हो गई। इस वजह से मेहमान पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। संख्या में लगातार कमी आ रही है। आकड़ों की मानें तो वर्ष 2017 में प्रवासी पक्षियों की संख्या 6417 थी। जो वर्ष 2020 में घटकर 5219 रह गई। वर्तमान में संख्या और कम हो गई, हालांकि पिछले चार सालों से गणना भी नहीं कराई गई।
संख्या कम होने के ये हैं मुख्य कारण
शारदा डैम में वर्षों से सफाई न होने से चारे की कमी
डैम में जलकुंभी बढ़ना
वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियां बढ़ना
पक्षियों की सुरक्षा के दावे भी हवा-हवाई
प्रवासी पक्षियों का शिकार रोकने के लिए पीटीआर की बराही और महोफ रेंज के वनकर्मियों को डैम क्षेत्र में नजर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन हकीकत इससे परे है। डैम के बाहरी हिस्से में यदि कोई मुखबिरी मिल जाती है तो शिकारियों को पकड़कर कार्रवाई का ग्राफ बढ़ा लिया जाता है। बताते हैं कि पिछले दिनों पूर्व भी बराही रेंज के नौजल्हा चौकी के वनकर्मियों ने गभिया सहराई के एक व्यक्ति को पकड़ा। उसके पास से बरामद कट्टे में मरे हुए 10 प्रवासी पक्षी बरामद हुए। मामले में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की गई।
मत्स्य विभाग की लापरवाही भी हो चुकी उजागर
डैम में हर साल छोटी मछलियां छोड़ी जाती हैं। मत्स्य विभाग की देखरेख में यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। बाकायदा डैम की तलहटी के लोगों को समिति में शामिल किया जाता है, लेकिन इसमें भी खेल हावी रहता है। पूर्व में समिति की सदस्य रह चुकीं महाराजपुर गांव की ग्राम प्रधान ने छोटी मछलियां छोड़े जाने के मामले में मत्स्य विभाग पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर शासन तक शिकायत की थी।
वर्जन
साइबेरियन पक्षियों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय टीम को लगातार निगरानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। टीम डैम क्षेत्र में भी नजर रख रही है। शिकारियों की निगरानी भी की जाती है। - अरुण मोहन श्रीवास्तव, रेंजर, बराही
पहले की तुलना में प्रवासी पक्षियों की संख्या कम हुई है। इसके कई कारण है। पिछले चार साल से गणना भी नहीं हो सकी है। -अख्तर मियां, अध्यक्ष, वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी