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सरकारी मदद का इंतजार हो रहा लंबा, कैसे साकार का स्वरोजगार का सपना

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पीलीभीत। सरकारी मदद से स्वरोजगार का साधन जुटाने का सपना टूटता नजर आ रहा है। अल्पसंख्यक वर्ग के लोग मदद के लिए दो साल से विभाग के चक्कर काटने रहे हैं। पात्रता सूची में चयन होने के बाद भी उनको ऋण प्राप्त होने का लाभ नहीं मिल सका, क्योंकि शासन स्तर से बजट ही जारी नहीं किया गया।
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अल्पसंख्यक वर्ग के युवा और बेरोजगार ऋण लेकर अपना रोजगार स्थापित करें। इसे ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम लिमिटेड की ओर से टर्म लोन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऋण योजनाओं से उम्मीद पैदा होती है लेकिन उन उम्मीदों को झटका तब लगता है जब औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी कर्ज की राशि खाते में नहीं आए। दो वर्ष से ऐसा ही हाल है। आवेदक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विकास भवन स्थित कार्यालय से लेकर अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम लिमिटेड के लखनऊ स्थित कार्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन ऋण नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लाभार्थी अपना रोजगार स्थापित नहीं कर सके हैं।
कब कितने हुए आवेदन
वित्तीय वर्ष 2019-20 में 90 आवेदन हुए। इसमें 40 पात्र पाए गए। इसमें 31 आवेदकों ने पत्रावलियां पूरी करके विभाग में जमा कीं। दो साल बाद भी इनको योजना के तहत ऋण नहीं मिल सका। 2020-21 में 48 आवेदन हुए जिसमें 40 का चयन किया गया। इनको भी योजना के तहत ऋण नहीं मिल सका। अब ये लोग विभाग के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं।
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क्या है योजना
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम लिमिटेड द्वारा अल्पसंख्यक टर्म लोन योजना संचालित है जिसके तहत अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को रोजगार स्थापित कराने के लिए 1.5 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है। ये ऋण वह पांच सालों में बीस किस्तों में चुका सकते हैं। लाभार्थी को जितना ऋण मिलता है उसमें दस फीसदी अनुदान है। छह फीसदी ब्याज लिया जाता है।
किस काम के लिए मिलता है ऋण
- बकरी पालन, किराना स्टोर, जनरल स्टोर, डेयरी, सिलाई, बांसुरी, जरी जरदोजी, फर्नीचर, मैकेनिक, फोटो स्टेट की दुकान, ग्रिल विंडो आदि का कार्य करने के लिए ऋण दिया जाता है।
केस एक: सदर के रहने वाले जुल्फिकार ने योजना के तहत आवेदन किया था। उनको डेढ़ लाख रुपये का ऋण चाहिए था, जिससे वह अपना छोटा सा रोजगार स्थापित कर सकें। उनके लिए ऋण स्वीकृत तो हुआ लेकिन आज तक नहीं मिला।
केस दो: जहानाबाद क्षेत्र के रहने वाले आमिर ने भी अल्पसंख्यक टर्म लोन के लिए आवेदन किया था। उनको किराने की दुकान खोलनी थी। चयन सूची में नाम आकर वह खुश तो बहुत हुए लेकिन उनको ऋण आज तक नहीं मिल सका।
टर्म लोन योजना के लिए दो साल से बजट नहीं जारी हुुआ। पिछले सत्र में चालीस आवेदकों का चयन हुआ था, लेकिन उनका बजट जारी नहीं हुआ। योजना को लेकर नए निर्देश आए नहीं हैं।
- केपी सिंह, समाज कल्याण अधिकारी /प्रभारी अल्पसंख्यक अधिकारी व समाज
दौड़ लगवाई पर 105 लोगों को नही दिया गया ऋण
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना का लाभ पाने के लिए भी अभ्यर्थियों को कार्यालयों और बैंक का चक्कर काटना पड़ता है। इसमें भी महज चालीस फीसदी ही ऋण पाने में सफल हो पाते हैं। जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी प्रताप नारायन के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 250 आवेदन आए जिसमें 145 को ऋण मिला। इस बार अब तक मुख्यमंत्री योजना के तहत 12 और प्रधानमंत्री योजना के तहत 25 आवेदन मिले हैं।
कागजी पेंच में फंसते अभ्यर्थी
पूरनपुर क्षेत्र के रहने वाले रफीक खान ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत आवेदन किया। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद जब आवेदन बैंक पहुंचा तो वहां कुछ अन्य दस्तावेज मांग लिए गए जिनके बारे में आवेदन प्रोफार्मा में कोई जिक्र नहीं है। अब वह बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। अब तक ऋण नहीं मिल सका।
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