पीलीभीत। जिला अस्पताल की इमरजेंसी के शौचालय में किशोरी के प्रसव के मामले में डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस की मौजूदगी में जिला महिला अस्पताल में पीड़िता और नवजात के रक्त नमूने लिए गए। नमूनों को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) मुरादाबाद भेजा जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट विवेचना में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होगी।
मामला 22 फरवरी का है। कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी को पेट में दर्द और ब्लीडिंग की शिकायत होने पर परिजन जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। जांच के दौरान किशोरी शौचालय गई, जहां उसे प्रसव हो गया और उसने एक बच्ची को जन्म दिया।
अस्पताल स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों की मदद से किशोरी और नवजात को बाहर निकाला गया। इसके बाद नवजात को आईसीयू व किशोरी को उपचार के लिए महिला अस्पताल भेजा गया था। जिला अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर 20 अप्रैल को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर क्राइम कोतवाली द्वारा की जा रही है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पीड़िता के न्यायालय में बयान भी दर्ज कराए गए।
मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने पीड़िता और नवजात का डीएनए परीक्षण कराने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली पीड़िता और नवजात को लेकर शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल पहुंचे, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में दोनों के रक्त नमूने लिए गए। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, डीएनए सैंपलिंग की पूरी प्रक्रिया करीब दो घंटे तक चली। नमूनों को सुरक्षित तरीके से सील कर जांच के लिए एफएसएल मुरादाबाद भेजने की तैयारी की गई है। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद उसे पुलिस विवेचना का हिस्सा बनाया जाएगा।
सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर अस्पताल प्रशासन को डीएनए सैंपलिंग की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए थे, इसी के तहत जांच की प्रक्रिया पूरी कराई गई। संवाद