पढ़ाई के अलावा प्रीती घर में पैर से झाडू लगाना, हैंडपंप से पानी निकालना, बर्तन धोना आदि काम भी पैरों से करती है। प्रीती लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। प्रीती का सपना भविष्य में शिक्षिक बनने का है। इसके लिए पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई कर रही है ताकि बच्चों का मार्ग दर्शक बनकर उनको कठिन परिस्थतियों में भी सफल बनाने का मंत्र दे सके। प्रीती की मां विंद्रा देवी ने भावुक होकर बताया कि बेटी जो करना चाहेगी उसे करवाऊंगी।
शुरुआत में शिक्षक बोले- कैसे लिखेगी प्रीती
विंद्रा देवी ने बताया कि पैर से घर के काम में हाथ बंटाने के साथ बच्चों को पढ़ता देख प्रीती ने भी पढ़ने की जिद की। शुरू में तो उसे उसकी दिव्यांगता को लेकर समझाया। मगर नहीं मानी तब गांव के परिषदीय स्कूल में छह साल की उम्र पर जब उसका दाखिला करने पहुंचे। तब मास्टर साहब बोले यह कैसे लिखेगी। इसे घर ले जाओ। बमुश्किल उसका कक्षा एक में दाखिला कराया। प्रीती में पहले से ही पढ़ने की ललक थी। उसने पैर से लिखना शुरू कर दिया।
कक्षा पांच पास करने के बाद कॉलोनी नंबर दो में जब उसका दाखिला कराने रिजल्ट और टीसी लेकर पहुंची। तब इस स्कूल में भी शिक्षक शुरू में उसका दाखिला करने को राजी नहीं थे। प्रीती ने कड़ी मेहनत कर कक्षा आठ की परीक्षा पास कर ली। इसके बाद उसका निजी स्कूल में दाखिला कराया। इस बार वह हाईस्कूल की परीक्षा दे रही है। अब तक हुए पेपरों से संतुष्ट प्रीती हाईस्कूल में अच्छे नंबरों से पास होने की उम्मीद जता रही है।