पीलीभीत। टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में 20 मई को मृत मिला बाघ पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का नहीं, बल्कि उत्तराखंड का निकला। यह खुलासा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के देहरादून स्थित कार्यालय से कराई जांच के बाद किया है। इस मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। फिलहाल इस मामले में टाइगर रिजर्व प्रशासन की कार्रवाई जारी है।
टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज के खकरा कंपार्टमेंट 15 में 20 मई को गश्त के दौरान एक बाघ का शव सड़ी गली अवस्था में मिला था। जिस स्थान पर बाघ का शव मिला था, उत्तराखंड की सुरई रेंज से करीब 200 मीटर की दूरी पर है। सूचना मिलते ही बरेली से मुख्य संरक्षक ललित वर्मा समेत स्थानीय अफसर भी मौके पर पहुंचे थे। बाघ के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आनेे के बाद टाइगर रिजर्व के अधिकारी बाघ की मौत आपसी संघर्ष के कारण होने की संभावना जता रहे थे।
इधर जब बाघ के शव को कब्जे में लिया जा रहा था तो उस दौरान टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने बाघ के ऊपरी हिस्से की फोटो लेकर जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को भेजी थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाघ टाइगर रिजर्व का है या किसी और जंगल का। इधर बुधवार को टाइगर रिजर्व प्रशासन को इंस्टीट्यूट से मिली रिपोर्ट प्राप्त हो गई। टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का दावा है कि मृत बाघ पीलीभीत टाइगर रिजर्व का नहीं उत्तराखंड का है। अब बाघ की मौत कैसे हुई और वह यहां तक कैसे पहुंचा, फिलहाल टाइगर रिजर्व प्रशासन इस मामले में अब भी जांच कर रहा है। वहीं महोफ रेंज के रेंजर समेत सभी स्टाफ से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। रेंजर समेत सभी वनकर्मियों ने अपना स्पष्टीकरण मुख्यालय को प्राप्त करा दिया है।
महोफ रेंज में मृत मिले बाघ की जांच वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट से कराई गई थी। जांच में बाघ उत्तराखंड का पाया गया है। इससे उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। महोफ रेंज के स्टाफ का स्पष्टीकरण प्राप्त हो चुका है। इसे शासन को भेजा जा रहा है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व