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तालाबा से निकलकर घर में घुसा मगरमच्छ, वन विभाग की टीम ने नदी में छोड़ा

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मगरमच्छ को खन्नौत नदी में छोड़ा गया। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत/बीसलपुर। बारिश का मौसम है। नदियों से निकलकर मगरमच्छ नालों और तालाबों के जरिये आबादी के बीच तक पहुंच रहे हैं। ताजा मामला बीसलपुर के गांव जसौली में सामने आया। यहां मंगलवार की रात एक मगरमच्छ तालाब से बाहर निकल कर संजय गंगवार के घर की बैठक तक पहुंच गया। संजय गंगवार ने उसे बैठक में बंद कर दिया और सुबह वन विभाग को सूचना दी। टीम ने उसे रेस्क्यू कर खन्नौत नदी में छोड़ दिया है।
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बीसलपुर तहसील क्षेत्र के गांव जसोली में तालाब के निकट ही ही संजय गंगवार का घर है। मंगलवार की देर रात मगरमच्छ तालाब से बाहर निकलकर घर की बैठक में घुस गया। संजय गंगवार ने बैठक के दरवाजे बंद कर दिए और सुबह वन विभाग सूचना दी। टीम सुबह सात बजे गांव पहुंची। आधा घंटे तक मगरमच्छ का रेस्क्यू किया गया। रेंजर राकेश कुमार ने बताया कि वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को पकड़कर खन्नौत नदी में छोड़ दिया।
जिले में काफी संख्या पर गणना नहीं
जिले में मगरमच्छों की संख्या काफी है लेकिन इनकी गणना नहीं हुई। देवहा नदी का किनारा मगरमच्छ प्रभावित क्षेत्र है। प्राकृतिक वास स्थलों पर रहने वाले मगरमच्छ मानसून सक्रिय होते ही ग्रामीण क्षेत्रों के निकट नदी, तालाबों में पहुंचने लगते हैं। ग्रामीण इस बात से अनजान रहते हैं। नतीजतन मगरमच्छ के हमले की घटनाएं बढ़ जाती है।
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बारिश शुरू होते ही बदलते हैं स्थान
जिले में नदियों का जाल होने के साथ प्राकृतिक जलाशयों का भंडार है। इसके चलते मगरमच्छों की संख्या भी अधिक है। बरसात से पूर्व मगरमच्छ अपने प्राकृतिक वास स्थलों में ही डेरा जमाए रहते हैं, लेकिन बरसात शुरू होने के बाद उनका स्थान बदलने लगता है। जानकारों के मुताबिक बरसात के दौरान अधिकांश खेतों में पानी भरा रहता है। इससे मगरमच्छ नदी, जलाशयों से निकलकर आबादी क्षेत्र के निकट से गुजरने वाले माइनरों और तालाबों तक पहुंचने लगते हैं। पानी के निकट पहुंचते ही ग्रामीणों पर हमलवर हो जाते हैं। मवेशियों को चराते और फसलों में पानी लगाते समय घटना होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है।
हमले की घटनाएं, कई ने गवाई जान
बीसलपुर और अमरिया क्षेत्र में मगरमच्छ हमले की घटनाएं अधिक हुईं हैं। पिछले वर्ष 16 जून को न्यूरिया क्षेत्र के बंगाली कॉलोनी निवासी शरद मलिक को मगरमच्छ ने हमलाकर निवाला बना लिया था। 27 जून को न्यूरिया क्षेत्र के गांव रूरा रामनगर निवासी डोरी लाल के 12 वर्षीय पुत्र जानकी प्रसाद पर मवेशियों को पानी पिलाते समय मगरमच्छ निगल गया था। 28 जून को अमरिया क्षेत्र के हर रायपुर निवासी प्रमोद पर तालाब में मछली पकड़ते समय मगरमच्छ ने हमला कर दिया था। 30 जून को गांव सिरसा निवासी 13 वर्षीय ओमप्रकाश पर खकरा नदी में मवेशियों को पानी पिलाते समय मगरमच्छ ने हमला किया था।
यह भी जान लीजिए
मगरमच्छ पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा सरीसृप है। आयु करीब 100 वर्ष तक होती है। सिर के पीछे छोटे-छोटे शल्क होते हैं। इसमें सूंघने, देखने और सुनने की क्षमता अधिक होती है। समुद्र, नदियों तथा झीलों में पाए जाते हैं। यह खुरदरी खाल वाला सरीसृप है, जिसकी लंबाई करीब 10 से 20 फुट और वजन 300 किलोग्राम तक होता है। छोटे केकड़ों, मछलियों और मेंढकों को भी खाते हैं। कभी-कभी पानी की सतह पर भी आराम से तैरते रहते हैं।
क्यों निकलते हैं मगरमच्छ
डीएफओ सामाजिक वानिकी संजीव कुमार ने बताया कि जब नदी में जलस्तर बढ़ता है तो मगरमच्छों का स्थान परिवर्तन होता है। वे जब पानी की सतह पर होते हैं और आसपास जमीन दिखती है तो शिकार की तलाश में बाहर आ जाते हैं। इसलिए जलाशयों और नदी के आसपास के रहने वालों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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