पीलीभीत। हाय मौसम की बेरुखी! बारिश की आस लगाए बैठे अन्नदाता की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं। पहले धान की रोपाई में डीजल पर पानी की तरह पैसा बहाया। अब धान की फसल को जीवित रखने के लिए बारिश भी धोखा दे रही है। मौसम की बेरुखी और कमर तोड़ डीजल की महंगाई से अन्नादाता बेहाल है। नहरों का पानी भी खेतों में सिंचाई के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।
अगर बारिश नहीं हुई, तो जिले में 1.35 लाख हेक्टेयर धान की फसल पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वैसे तो जिले में नहरों का मकड़जाल है, मगर इस दहकती दोपहरी और भीषण गर्मी में नहर का पानी भी खेतों में नाकाफी साबित हो रहा है। किसान लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं, मगर बारिश नहीं हो रही है। कुछ किसान तो डीजल की व्यवस्था कर खेतों में पंपिंग सेट से धान में पानी लगाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर एक ओर पानी लगाने के बाद ही दूसरी ओर सूख जाता है।
जिले में 1.9 लाख हेक्टेयर गन्ने की फसल है। गन्ने को भी पर्याप्त पानी नहीं मिला पा रहा है। इससे किसानों को दोनों फसलों के लिए संकट बना हुआ है। आलम यह है कि जिले में 92 पेट्रोल पंप है। सभी पर डीजल लेने के लिए किसानों की भीड़ दिखाई दे रही है।
एक किसान की कहानी, उसी की जुबानी
गांव सिमरौली निवासी किसान प्रवेश सिंह ने बताया कि डेढ़ माह पहले दस एकड़ में धान की फसल लगाई है। सिंचाई के लिए ट्यूबवेल लगा हुआ है। बारिश नहीं होने से लगातार ट्यूबवेल से धान की सिंचाई कर रहे थे। इसी दौरान ट्यूबवेल का ट्रांसफार्मर फुंक गया। अब पंपिंग सेट से धान की सिंचाई कर रहे हैं। पंपिंग सेट से तीन से चार बार पानी खेतों में भरने से 30 से 35 हजार का डीजल खर्च हो चुका है। अगर बारिश नहीं हुई, तो धान को बचाना काफी मुश्किल हो जाएगा। भीषण गर्मी से सूखती धान की फसल देख घबराहट होती है, मगर डीजल की महंगाई भी धान को बचाने में नासूर बनी रही है।
कृषि वैज्ञानिक बोले कि फसल को नहीं है खास नुकसान
कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ढाका ने बताया कि नहर और पंपिंग सेट से धान और गन्ने की सिंचाई 90 फीसदी उपयोगी होती है। देर से सही मगर बारिश होगी। बारिश नहीं होने के दौरान फसलों में बीमारियां लग जातीं हैं। जो बारिश होने पर दूर हो जाएगी। हालांकि बुधवार से बारिश शुरू हो रही है। अगर पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे हैं, तो उससे भी धान को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा है। जिससे धान खराब नहीं होगा। इससे किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है।
धान की फसल घटी और गन्ना की बड़ी
जिले में धान की फसल इस बार चार हजार हेक्टेयर घटी है। गन्ने की सात हजार हेक्टेयर फसल बढ़ गई है। पिछले साल धान की फसल 1.39 लाख हेक्टयर थी। जबकि इस बार 1.35 लाख हेक्टेयर रह गई है। गन्ना की फसल पिछले साल एक लाख दो हजार हेक्टेयर थी। इस बार किसानों ने गन्ने की फसल में बढ़ोतरी की है। अब एक लाख नौ हजार हेक्टेयर हो गई है। मगर बारिश नहीं होने से दोनों फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।