बराही जंगल से सटे खेत में बने एक घर (झाले) में घुसकर बाघ ने गाय को मारा
डाला और उसका शव घटना स्थल से डेढ़ किमी दूर गन्ने के खेत में ले जाकर
छोड़ दिया। सुबह जानकारी होने पर बड़ी संख्या में लोग घटना स्थल पर जमा हो
गए। ग्रामीणों ने वन्यजीवों के बार बार जंगल से बाहर आकर पालतू पशुओं पर
हमला करने पर नाराजगी व्यक्त कर प्रदर्शन किया।
थाना क्षेत्र के बराही
निवासी गोधनलाल जंगल से कुछ दूर खेत में झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रहता
है। मंगलवार को वह क्षेत्र के फार्मर छदा सिंह के खेत पर रखवाली करने गया
था जबकि उपरिवार घर में सोया था। सुबह लगभग साढ़े तीन बजे वहां पहुंचे बाघ
ने घर में बंधी गोधनलाल की गाय पर हमला कर मारा डाला और उसे खींच ले गया।
बाघ के हमले के कारण घर में बंधे अन्य पशु रस्सी तोड़कर भागने लगे।
पशुओं
की आहट होने पर घर वाले जाग गए और बाहर आकर देखा तो गाय गायब थी। वहां खून
पड़ा था। मौके की स्थिति देख घर वालों को मजरा समझते देर नहीं लगी।
उन्होंने शोर मचाना शुरू किया। इससे आसपास झालों पर रहे लोग पहुंच गए। कुछ
देर बाद गोधनलाल भी पहुुंच गया। घटना स्थल से बाघ द्वारा गाय के घसीटे से
बने निशान को देखते हुए करीब डेढ़ किमी दूर दलविंदर सिंह के खेत पर पहुंचे।
यहां गन्ने के निकट गाय का शव पड़ा था। उसके गर्दन पर बाघ के हमले के
निशान थे।
इस बीच वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह भी टीम के साथ पहुंचे।
उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर बाघ के पद चिंहों का पीछा किया जो कुछ दूर
स्थित गन्ने के दूसरे खेत तक गए थे। देरशाम तक बाघ का पता नहीं चला था।
मौके पर पहुंचे डीएफओ कैलाश प्रकाश ने गोधनलाल को एक हजार रुपये सहायता के
रूप में दिए। उन्होंने कहा रिपोर्ट शासन को भेजकर जल्द मुआवजा दिलाया
जाएगा।
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डीएफओ का घेराव कर जताया विरोध
बाघ द्वारा गाय के मारे
जाने की सूचना पर पहुंचे डीएफओ कैलाश प्रकाश का ग्रामीणों ने घेराव कर
नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल से निकलकर वन्यजीव अक्सर पालतू
पशुओं पर हमला कर उरहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने जंगल
किनारे तार फेंसिंग कराने की मांग कर डीएफओ को ज्ञापन भी सौंपा।