धान की फसल में खाद डलवा रहे एक किसान पर गुरुवार को बाघ ने हमला कर दिया। चीख सुनकर खाद डाल रहे किसान के बेटों ने साहस दिखाकर अपने पिता को किसी तरह बाघ के मुंह से छुड़ा तो लिया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। क्षेत्र में पिछले चार दिन में बाघ के हमले में यह तीसरी मौत हुई है। जिले में नौ माह में बाघ 18 लोगों को मार चुका है। इससे बाघ की दहशत और बढ़ गई है। सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव बेहरी निवासी 46 वर्षीय कुंवरसेन सुबह दो बेटों 22 वर्षीय गिरीश कुमार और 18 वर्षीय हीरालाल के साथ गांव के निकट देवहा नदी के पार स्थित खेत में खाद डलवाने गए थे। बेटे खेत में खाद डाल रहे थे और कुंवरसेन मेड़ पर खड़े होकर निगरानी कर रहे थे। इस बीच करीब साढ़े नौ बजे अचानक झाड़ियों से निकले बाघ ने कुंवरसेन पर हमला कर दिया। उनके चीखने पर दोनों बेटे उनकी ओर दौड़े। बाघ कुंवरसेन की गर्दन को मुंह में दबाकर उन्हें झाड़ियों की ओर ले जाने लगा। दोनों बेटों ने पिता को छुड़ाने के लिए हिम्मत जुटाकर उनके पैर पकड़ लिये, इससे बाघ कुंवरसेन को छोड़कर चला गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
अगर पकड़ा नहीं गया तो बाघ को मार देंगे
वन संरक्षक वीके सिंह ने कहा कि वन महकमा इस निर्णय पर पहुंच चुका है कि जंगल से बाहर घूम रहा यह बाघ मानव जीवन के लिए खतरा बन गया है। इसे बेहोश कर पकड़ने के आदेश हो चुके हैं। अगर इसमें कामयाबी नहीं मिली तो आगे उसे मारने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।