बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है। उनके उज्जवल भविष्य के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य या फिर सुरक्षा। सभी पहलुओं पर शासन-प्रशासन संजीदगी के दावे करता है। पर अफसोस जिले में मासूम जिंदगियां दरिंदों की हवस की भेंट चढ़ रही हैं। दरिंदगी ही नहीं उनकी जान भी खतरे में हैं। बीसलपुर के खिरकिया गांव में दलित बच्ची के साथ घटित वारदात के बाद एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह बात दीगर रही कि हर कोई घटना के बाद पुलिस व्यवस्था को दोषी ठहराने में लगा हुआ है। लापरवाही बरती भी गई, लेकिन कहीं न कहीं समाज में खुलेआम घूम रहे इस तरह के असामाजिक लोगों पर सख्ती करने की जरूरत भी है। पुलिस तो गंभीरता से कार्रवाई करे, साथ ही लोगों को भी जागरूक होकर ऐसे लोगों के चिन्हितीकरण में आगे आना होना। पूर्व में घटित अधिकांश घटनाओं के खुलासे के बाद आरोपी कोई न कोई करीबी ही निकला, नहीं तो एक ही जगह का रहने वाला। चंद दिन सख्ती के बाद भुला दिया गया। दुबारा कोई वारदात घटित न हो इसके लिए की गई प्लानिंग कागजों में ही सिमट कर रह गई। नतीजतन एक साल में कई मासूमों की जिंदगी हवस के आगे तार तार हो गई। अब बीसलुपर में हुई वारदात के बाद फिर वहीं शोर, आक्रोश और रोकथाम को लेकर मंथन का सिलसिला जारी है। पुलिस अफसर रटेरटाए पुराने बयानों को दोहराते हुए साख बचाने में जुटे हुए हैं।
एक साल में हुई ये प्रमुख वारदातें
21 फरवरी माह में माधौटांडा क्षेत्र दस वर्षीय बालिका की रेप के बाद हत्या।
22 फरवरी को कोतवाली क्षेत्र में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म।
सात मार्च को सुनगढ़ी के एक गांव में आठ वर्षीय बालिका की रेप के बाद हत्या।
मई माह में कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में पांच बच्ची से दुष्कर्म।
जून माह में जहानाबाद में दिव्यांग किशोरी से दुष्कर्म।
अगस्त माह में अमरिया क्षेत्र में सात साल की बच्ची से दुष्कर्म।
जून माह में कोतवाली क्षेत्र में आठ वर्षीय बालक से कुकर्म।
28 अक्तूबर को कोतवाली क्षेत्र में दस वर्षीय बालक से कुकर्म में असफल होने पर जानेलवा हमला।
30 अक्तूबर की रात मझोला में पांच साल की बालिका से दुष्कर्म।
चार नवंबर को बीसलपुर में आठ साल की बच्ची की दुष्कर्म, अप्राकृति दुराचार के बाद हत्या।
छह नवंबर को जहानाबाद के एक गांव में छोटी बहन से रेप, बड़ी बहन से कोशिश।
बयानबाजी तक सीमित रह गए प्रयास
बच्चों के साथ हुई दरिंदगी की घटनाओं के बाद पुलिस महकमे की ओर से हर बार लोगों के बीच घूमने वाले खासकर घुमंतु और नशेड़ियों को चिन्हित कर कार्रवाई के दावे किए जाते हैं। इसमें संभ्रांत लोगों से भी मदद मांगी जाती है। कुछ दिन गंभीरता से कार्य करने के बाद खुलासा होते ही कार्रवाई ठप पड़ जाती है। इधर पुलिस भूलती है, उधर लोग भी निगाहें फेर लेते हैं।
दो घटनाओं में पुलिस ने लगा दी फाइनल रिपोर्ट
एक तरफ संजीदगी के दावे तो वहीं दूसरी ओर गुनहगार तलाशने में भी पुलिस सफल नहीं हो सकी। सितंबर 2015 में बरखेड़ा के जिरौनिया गांव में हुई रेप के बाद हत्या का मामला कागजों में ही सिमट कर रह गया। इधर कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ले की छह साल की बालिका से 22 फरवरी को हुई दरिंदगी के मामले में भी पुलिस ने करीबियों पर शक जाहिर होने के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मामले में पिता की ओर से हाल ही में शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई गई है।